Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1310

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- शतं वैखानसाः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प꣡व꣢मानस्य꣣ जि꣡घ्न꣢तो꣣ ह꣡रे꣢श्च꣣न्द्रा꣡ अ꣢सृक्षत । जी꣣रा꣡ अ꣢जि꣣र꣡शो꣢चिषः ॥१३१०॥

प꣡व꣢꣯मानस्य । जि꣡घ्न꣢꣯तः । ह꣡रेः꣢꣯ । च꣣न्द्राः꣢ । अ꣣सृक्षत । जीराः꣢ । अ꣣जिर꣡शो꣢चिषः । अ꣣जिर꣢ । शो꣣चिषः ॥१३१०॥

Mantra without Swara
पवमानस्य जिघ्नतो हरेश्चन्द्रा असृक्षत । जीरा अजिरशोचिषः ॥

पवमानस्य । जिघ्नतः । हरेः । चन्द्राः । असृक्षत । जीराः । अजिरशोचिषः । अजिर । शोचिषः ॥१३१०॥

Samveda - Mantra Number : 1310
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 9;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
‘शतं वैखानसः'='‘सैकड़ों वासनाओं को [वि+खन्] विशेषरूप से खोद डालनेवाला' । प्रस्तुत मन्त्र का ऋषि अपने जीवन को पवित्र कर लेता है। इस (पवमानस्य) = अपने हृदय को पवित्र करनेवाले (जिघ्नतः) = दुर्गुणों को नष्ट करते हुए (हरे:)= इन्द्रियों का प्रत्याहार करनेवाले वैखानस की (चन्द्राः) = बड़े आह्लाद को जन्म देनेवाली (जीराः) = शीघ्रता से कार्यों में व्याप्त होनेवाली (अजिरशोचिषः) = कभी जीर्ण न होनेवाली ज्योतियाँ (असृक्षत्) = उत्पन्न होती हैं।

मनुष्य को तीन पग रखने हैं – १. पवित्र बनना, २. दुर्गुणों का नाश करना, ३. इन्द्रियों का प्रत्याहरण। इन तीन पगों के रखने पर उसके जीवन में वे ज्योतियाँ जगेंगी, जो १. आह्लादमयता को जन्म देती हैं, २. उसके जीवन में स्फूर्ति लाती हैं तथा ३. जो जीर्ण नहीं होती ।
Essence
पवमान बनकर हम अमर ज्योति प्राप्त करें ।
Subject
न जीर्ण होनेवाली ज्योतियाँ