Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1303

1875 Mantra
Devata- पवमानाध्येता Rishi- पवित्र आङ्गिरसो वा वसिष्ठो वा उभौ वा Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
पा꣣वमानीः꣡ स्व꣣स्त्य꣡य꣢नी꣣स्ता꣡भि꣢र्गच्छति नान्द꣣न꣢म् । पु꣡ण्या꣢ꣳश्च भ꣣क्षा꣡न्भ꣢क्षयत्यमृत꣣त्वं꣡ च꣢ गच्छति ॥१३०३

पावमानीः꣣ । स्व꣣स्त्य꣡य꣢नीः । स्व꣣स्ति । अ꣡य꣢꣯नीः । ता꣡भिः꣢꣯ । ग꣣च्छति । नान्दन꣢म् । पु꣡ण्या꣢꣯न् । च꣣ । भक्षा꣢न् । भ꣣क्षयति । अमृतत्व꣢म् । अ꣣ । मृतत्व꣢म् । च꣣ । गच्छति ॥१३०३॥

Mantra without Swara
पावमानीः स्वस्त्ययनीस्ताभिर्गच्छति नान्दनम् । पुण्याꣳश्च भक्षान्भक्षयत्यमृतत्वं च गच्छति ॥१३०३

पावमानीः । स्वस्त्ययनीः । स्वस्ति । अयनीः । ताभिः । गच्छति । नान्दनम् । पुण्यान् । च । भक्षान् । भक्षयति । अमृतत्वम् । अ । मृतत्वम् । च । गच्छति ॥१३०३॥

Samveda - Mantra Number : 1303
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 7;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
ये १. (पावमानी:) = हमारे जीवनों को पवित्र करनेवाली ऋचाएँ २. (स्वस्त्ययनी:) = हमें उत्तम मार्ग से ले-चलनेवाली हैं। इनका अध्ययन हमें ऐसी प्रेरणा देता है कि हम अशुभ मार्गों को छोड़कर शुभ मार्ग पर ही चलते हैं । ३. (ताभिः) = इन ऋचाओं के द्वारा मनुष्य (नान्दनम्) = परमानन्द के धाम प्रभु को (गच्छति) = प्राप्त करता है। शुभ मार्ग पर चलता हुआ अन्त में प्रभु के समीप पहुँचता ही है। ४. इन पावमानी ऋचाओं को पढ़ने पर यह (पुण्यान् च भक्षान् भक्षयति) = पुण्य ही भोजनों को खाता है । ५. (अमृतत्वं च गच्छति) = और मोक्ष को प्राप्त करता है। संक्षेप में वेदाध्ययन के लाभ निम्न हैं— १. पवित्रता, २. शुभ मार्ग से चलना, ३. प्रभु के आनन्दधाम को प्राप्त करना, ४. सात्त्विक भोजन के सेवन की रुचि, ५. मोक्ष प्राप्ति तथा असमय में मृत्यु का न होना । 
Essence
हम पावमानी ऋचाओं को अपनाकर प्रभु के परमानन्द को प्राप्त करें ।
Subject
आनन्दधाम की प्राप्ति