Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1302

1875 Mantra
Devata- पवमानाध्येता Rishi- पवित्र आङ्गिरसो वा वसिष्ठो वा उभौ वा Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
ये꣡न꣢ दे꣣वाः꣢ प꣣वि꣡त्रे꣢णा꣣त्मा꣡नं꣢ पु꣣न꣢ते꣣ स꣡दा꣢ । ते꣡न꣢ स꣣ह꣡स्र꣢धारेण पावमा꣣नीः꣡ पु꣢नन्तु नः ॥१३०२

ये꣡न꣢꣯ । दे꣣वाः꣢ । प꣣वि꣡त्रे꣢ण । आ꣣त्मा꣡न꣢म् । पु꣣न꣡ते꣢ । स꣡दा꣢꣯ । ते꣡न꣢꣯ । स꣣ह꣡स्र꣢धारेण । स꣣ह꣡स्र꣢ । धा꣣रेण । पावमानीः꣣ । पु꣣नन्तु । नः ॥१३०२॥

Mantra without Swara
येन देवाः पवित्रेणात्मानं पुनते सदा । तेन सहस्रधारेण पावमानीः पुनन्तु नः ॥१३०२

येन । देवाः । पवित्रेण । आत्मानम् । पुनते । सदा । तेन । सहस्रधारेण । सहस्र । धारेण । पावमानीः । पुनन्तु । नः ॥१३०२॥

Samveda - Mantra Number : 1302
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 7;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
(देवाः) = देवलोग (येन) = जिस (पवित्रेण) = ज्ञान के द्वारा (नहि ज्ञानेन सदृशं पवित्रमिह विद्यते) (आत्मानम्) = अपने को (सदा) = हमेशा (पुनते) = पवित्र करते हैं तेन (सहस्रधारेण) = उस (सहस्रं धाराः यस्य, धारा=वाणी) सहस्रों वाणियोंवाले वेद से (पावमानीः) = ये पवित्र ऋचाएँ (नः) = हमें (पुनन्तु) = पवित्र कर डालें। वेद ज्ञान की वाणियों से परिपूर्ण है। ये ज्ञान की वाणियाँ ‘पावमानी’=पवित्र करनेवाली हैं। जैसे जलों की शतशः धाराएँ हमारे बाह्य मलों को धो डालती हैं, इसी प्रकार वेद की ये ज्ञानात्मक धाराएँ हमारे अन्तःकरणों को शुद्ध कर डालें। ज्ञान ही पवित्र है। ये ऋचाएँ ज्ञान से परिपूर्ण हैं, अतः ये सचमुच ‘पावमानी’ हैं।
Essence
ये पावमानी ऋचाएँ हमारे लिए सचमुच पावमानी हों।
Subject
सहस्रधार पवित्र