Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1301

1875 Mantra
Devata- पवमानाध्येता Rishi- पवित्र आङ्गिरसो वा वसिष्ठो वा उभौ वा Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
पा꣣वमानी꣡र्द꣢धन्तु न इ꣣मं꣢ लो꣣क꣡मथो꣢꣯ अ꣣मु꣢म् । का꣢मा꣣न्त्स꣡म꣢र्धयन्तु नो दे꣣वी꣢र्दे꣣वैः꣢ स꣣मा꣡हृ꣢ताः ॥१३०१

पा꣣वमानीः꣢ । द꣣धन्तु । नः । इम꣢म् । लो꣣क꣢म् । अ꣡थ꣢꣯ । उ꣣ । अमु꣢म् । का꣡मा꣢꣯न् । सम् । अ꣣र्धयन्तु । नः । देवीः꣡ । दे꣣वैः꣡ । स꣣मा꣡हृ꣢ताः । स꣣म् । आ꣡हृ꣢꣯ताः ॥१३०१॥

Mantra without Swara
पावमानीर्दधन्तु न इमं लोकमथो अमुम् । कामान्त्समर्धयन्तु नो देवीर्देवैः समाहृताः ॥१३०१

पावमानीः । दधन्तु । नः । इमम् । लोकम् । अथ । उ । अमुम् । कामान् । सम् । अर्धयन्तु । नः । देवीः । देवैः । समाहृताः । सम् । आहृताः ॥१३०१॥

Samveda - Mantra Number : 1301
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 7;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
(पावमानीः) = हमारे जीवनों को पवित्र करनेवाली ये ऋचाएँ १. (नः) = हमें (दधन्तु) = धारण करें। (नः) =हमारे (इमं लोकम्) = इस लोक का तो (दधन्तु) = पोषण करें हीं, (अथ उ) = और निश्चय से (अमुं लोकम्) = परलोक का भी दधन्तु=धारण करें। हमारे इस लोक को ये रसमय बनाएँ तो हमारे परलोक को मोक्षामृत प्राप्त करानेवाला करें। २. ये (नः) = हमारे (कामान्) = इष्ट कामों को (समर्धयन्तु) = समृद्ध करनेवाली हों। इस लोक में हमें इष्ट काम्य पदार्थों को ये प्राप्त करानेवाली हों। इनके अन्दर दिया गया विज्ञान हमें प्राकृतिक पदार्थों का सुखमय उपयोग करने में सशक्त करे तथा ३. (देवैः) = दिव्य गुणोंवाले पुरुषों से (समाहृताः) = संगृहीत हुई-हुई ये पावमानी ऋचाएँ (देवीः) = सचमुच हमें दिव्य बनानेवाली हों। इनके द्वारा हमारा जीवन ऊँचा और ऊँचा होता चले। इस लोक में ये हमें वैज्ञानिक उन्नति द्वारा अभीष्ट पदार्थ प्राप्त कराके अभ्युदय को प्राप्त करनेवाला बनाएँ, और ज्ञान से हमारे जीवनों को दिव्य गुणयुक्त करती हुई परलोक में हमारे निःश्रेयस को सिद्ध करें।
Essence
पावमानी ऋचाएँ हमारे अभ्युदय और निःश्रेयस की साधक हों।
Subject
'यह लोक' और 'परलोक'