Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1300

1875 Mantra
Devata- पवमानाध्येता Rishi- पवित्र आङ्गिरसो वा वसिष्ठो वा उभौ वा Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
पा꣣वमानीः꣢ स्व꣣स्त्य꣡य꣢नीः सु꣣दु꣢घा꣣ हि꣡ घृ꣢त꣣श्चु꣡तः꣢ । ऋ꣡षि꣢भिः꣣ सं꣡भृ꣢तो꣣ र꣡सो꣢ ब्राह्म꣣णे꣢ष्व꣣मृ꣡त꣢ꣳ हि꣣त꣢म् ॥१३००

पा꣣वमानीः꣢ । स्व꣣स्त्य꣡य꣢नीः । स्व꣣स्ति । अ꣡यनीः꣢꣯ । सु꣣दु꣡घाः꣢ । सु꣣ । दु꣡घाः꣢꣯ । हि । घृ꣣तश्चु꣡तः꣢ । घृ꣣त । श्चु꣡तः꣢꣯ । ऋ꣡षि꣢꣯भिः । स꣡म्भृ꣢꣯तः । सम् । भृ꣣तः । र꣡सः꣢꣯ । ब्रा꣣ह्मणे꣡षु꣢ । अ꣣मृ꣡त꣢म् । अ꣣ । मृ꣡त꣢꣯म् । हि꣣त꣢म् ॥१३००॥

Mantra without Swara
पावमानीः स्वस्त्ययनीः सुदुघा हि घृतश्चुतः । ऋषिभिः संभृतो रसो ब्राह्मणेष्वमृतꣳ हितम् ॥१३००

पावमानीः । स्वस्त्ययनीः । स्वस्ति । अयनीः । सुदुघाः । सु । दुघाः । हि । घृतश्चुतः । घृत । श्चुतः । ऋषिभिः । सम्भृतः । सम् । भृतः । रसः । ब्राह्मणेषु । अमृतम् । अ । मृतम् । हितम् ॥१३००॥

Samveda - Mantra Number : 1300
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 7;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
ये ऋचाएँ १. (पावमानी:) = हमारे जीवनों को पवित्र करनेवाली हैं— मनोवृत्ति को उत्तम बनाकर ये हमारे जीवनों को सुन्दर बना देती हैं । २. (स्वस्त्ययनीः) = ये हमें सदा कल्याण के मार्ग पर लेचलनेवाली हैं, उत्तम कर्मों की प्रेरणा द्वारा हमें अशुभ मार्ग से निवृत्त करती हैं । ३. (सु-दुघा) = उत्तम वस्तुओं का हममें पूरण करनेवाली हैं। हमारे मनों में उत्तम भावनाओं को भरनेवाली हैं। ४. (हि) = निश्चय से ये (घृतश्चुतः) = हममें [घृ दीप्ति] दीप्ति को प्राप्त करानेवाली हैं, [घृ=क्षरण] मलों को दूर करके हमारी बुद्धियों की कुण्ठा को नष्ट करके ये हमारे ज्ञान को दीप्त करती हैं ।

इन्हीं के द्वारा (ऋषिभिः) = मन्त्रार्थद्रष्टाओं ने (रसः संभृतः) = अपने जीवन में रस का संचार किया अपने जीवन को मधुर बनाया और इन्हीं के द्वारा (ब्राह्मणेषु) = ब्रह्मज्ञानियों में (अमृतं हितम्) = मोक्ष निहित हुआ । इन्हीं का आश्रय करके उन्होंने अमरता का लाभ किया।
Essence
ऋचाओं से हम अपने जीवनों को पवित्र बनाएँ जिससे इहलोक में हमारा जीवन रसमय हो और परलोक में हम अमृत हों ।
Subject
रस व अमृत