Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1299

1875 Mantra
Devata- पवमानाध्येता Rishi- पवित्र आङ्गिरसो वा वसिष्ठो वा उभौ वा Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
पा꣣वमानी꣢꣫र्यो अ꣣ध्ये꣡त्यृषि꣢꣯भिः꣣ स꣡म्भृ꣢त꣣ꣳ र꣡स꣢म् । त꣢स्मै꣣ स꣡र꣢स्वती दुहे क्षी꣣र꣢ꣳ स꣣र्पि꣡र्म꣢꣯धूद꣣क꣢म् ॥१२९९॥

पा꣣वमानीः꣢ । यः । अ꣣ध्ये꣡ति꣢ । अ꣣धि । ए꣡ति꣢꣯ । ऋ꣡षि꣢꣯भिः । स꣡म्भृ꣢꣯तम् । सम् । भृ꣣तम् । र꣡स꣢꣯म् । त꣡स्मै꣢꣯ । स꣡र꣢꣯स्वती । दुहे । क्षीर꣢म् । स꣣र्पिः꣢ । म꣡धु꣢꣯ । उद꣣क꣢म् ॥१२९९॥

Mantra without Swara
पावमानीर्यो अध्येत्यृषिभिः सम्भृतꣳ रसम् । तस्मै सरस्वती दुहे क्षीरꣳ सर्पिर्मधूदकम् ॥

पावमानीः । यः । अध्येति । अधि । एति । ऋषिभिः । सम्भृतम् । सम् । भृतम् । रसम् । तस्मै । सरस्वती । दुहे । क्षीरम् । सर्पिः । मधु । उदकम् ॥१२९९॥

Samveda - Mantra Number : 1299
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 7;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
(यः) = जो (पावमानी:) = जीवन को पवित्र करनेवाली इन ऋचाओं को (अध्येति) = पढ़ता है, जिनके द्वारा (ऋषिभिः) = ऋषियों ने (रसं सभृतम्) = अपने जीवन में रस का संचार किया, अपने जीवन को रसमय बनाया, (तस्मै) = उस व्यक्ति के लिए (सरस्वती) = ज्ञान की अधिष्ठात्री देवी सरस्वती (दुहे) = दोहती है, उसका निम्न वस्तुओं से पूरण करती है – [दुह प्रपूरणे] । १. (क्षीरम्) = दूध, जो [ क्षियति] उत्तम निवास व गति का कारण बनता है। दूध के पान से मनुष्य का शरीर नीरोग तो बनता ही है, परन्तु साथ ही वह उत्तम गतिवाला – क्रियाशील भी रहता है २. (सर्पिः) = घृत, जोकि उसे दीप्त बनाता है [दीप्ति], उसके मलों का नाश करता है [क्षरण] और इस प्रकार उसे उत्तम क्रियाशील बनाता है [सृप्] ३. (मधु) = शहद जोकि उसे उत्तम मस्तिष्कवाला बनाता है [मन्यते] ४. (उदकम्) = पानी जो उसके शरीर में शुष्कता नहीं आने देता और उसके शरीर को सदा चमकीला बनाये रखता है, अर्थात् पावमानी ऋचाओं का अध्ययन करनेवाला अपने शरीर के धारण के लिए इन चार वस्तुओं को अधिक महत्त्व देता है और अपने जीवन को उन ऋषियों की भाँति ही रसमय बनाने का ध्यान करता है ।
Essence
दुग्ध, घृत, शहद व जल का समुचित प्रयोग हमारे जीवन को रसमय बनाये। 
Subject
दूध-घी-शदह-जल