Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1293

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- राहूगण आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स꣢ प꣣वि꣡त्रे꣢ विचक्ष꣣णो꣡ हरि꣢꣯रर्षति धर्ण꣣सिः꣢ । अ꣣भि꣢꣫ योनिं꣣ क꣡नि꣢क्रदत् ॥१२९३॥

सः । प꣣वि꣡त्रे꣢ । वि꣣चक्षणः꣢ । वि꣣ । चक्षणः꣢ । ह꣡रिः꣢꣯ । अ꣣र्षति । ध꣣र्णसिः꣢ । अ꣣भि꣢ । यो꣡नि꣢꣯म् । क꣡नि꣢꣯क्रदत् ॥१२९३॥

Mantra without Swara
स पवित्रे विचक्षणो हरिरर्षति धर्णसिः । अभि योनिं कनिक्रदत् ॥

सः । पवित्रे । विचक्षणः । वि । चक्षणः । हरिः । अर्षति । धर्णसिः । अभि । योनिम् । कनिक्रदत् ॥१२९३॥

Samveda - Mantra Number : 1293
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 6;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
(स:) = वह राहूगण १. (पवित्रे) = उस प्रभु में स्थित हुआ-हुआ २. (विचक्षणः) = एक विशेष दृष्टिकोण वाला, अर्थात् जीवन-यात्रा में एक विशेष लक्ष्य से चलनेवाला, जिस लक्ष्य का गतमन्त्र में वर्णन है ‘सुत से देवयु' तक पहुँचने के ध्येयवाला ३. (हरिः) = आर्त की आर्ति का हरण करनेवाला ४. (धर्णसिः) = सबके धारण के स्वभाववाला ५. (कनिक्रदत्) = प्रभु के नामों का उच्चारण करता हुआ (योनिम् अभि) = ब्रह्माण्ड के मूलकारण उस प्रभु की ओर (अर्षति) = गति करता है ।
Essence
हम जीवन-यात्रा में एक विशेष लक्ष्य से आगे बढ़ें।
Subject
वि-चक्षण-विशिष्ट उद्देश्यवाला