Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1289

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- नृमेध आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ए꣣ष꣢ ग꣣व्यु꣡र꣢चिक्रद꣣त्प꣡व꣢मानो हिरण्य꣣युः꣢ । इ꣡न्दुः꣢ सत्रा꣣जि꣡दस्तृ꣢꣯तः ॥१२८९॥

ए꣣षः꣢ । ग꣣व्युः꣢ । अ꣣चिक्रदत् । प꣡व꣢꣯मानः । हि꣣रण्य꣢युः । इ꣡न्दुः꣢꣯ । स꣣त्राजि꣢त् । स꣣त्रा । जि꣢त् । अ꣡स्तृ꣢꣯तः । अ । स्तृ꣣तः ॥१२८९॥

Mantra without Swara
एष गव्युरचिक्रदत्पवमानो हिरण्ययुः । इन्दुः सत्राजिदस्तृतः ॥

एषः । गव्युः । अचिक्रदत् । पवमानः । हिरण्ययुः । इन्दुः । सत्राजित् । सत्रा । जित् । अस्तृतः । अ । स्तृतः ॥१२८९॥

Samveda - Mantra Number : 1289
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 5;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
(एषः) = यह नृमेध १. (गव्युः) = [गौ:-वेदवाणी] वेदवाणी को अपने साथ जोड़ने की कामनावाला होता है— अथवा [गाव: इन्द्रियाणि] इन्द्रियशक्तियों को अपने साथ सम्बद्ध करता है । २. (अचिक्रदत्) = निरन्तर प्रभु का आह्वान करता है - प्रभु के नामों का जप करता हुआ अपने जीवन के लक्ष्य को ऊँचा बनानेवाला होता है । ३. (पवमानः) = प्रभु-स्मरण द्वारा वासनाओं की मैल को धो डालता है । ४. (हिरण्ययुः) = पवित्र बनकर यह [हिरण्यं - ज्योतिः] ज्योति को अपने साथ जोड़ता है, ५. साथ ही (इन्दुः) = [इन्द् to be powerful ] शक्तिशाली होता है। पवमान बनकर अपने जीवन को वासनाओं से आक्रान्त न होने देने के दो ही परिणाम हैं— [क] उसका ज्ञान बढ़ता है और [ख] उसकी शक्ति में वृद्धि होती है । ६. यह (सत्राजित्) = [सत्र- आजित्, सत्रं Virtue, wealth] सब गुणों और धनों का विजेता होता है । ७. (अस्तृतः) = अहिंसित रहता है । कामादि शत्रु इनकी हिंसा नहीं कर पाते ।
Essence
हम ज्ञान को चाहें, इन्द्रिय शक्तियों को बढ़ाएँ और इस प्रकार अहिंसित हों ।
Subject
नृमेध के जीवन की सात बातें