Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1284

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- प्रियमेध आङ्गिरसः (प्रथमपादः) नृमेध आङ्गिरसः (शेषास्त्रयः पादाः) Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ए꣣ष꣡ सूर्य꣢꣯मरोचय꣣त्प꣡व꣢मानो꣣ अ꣢धि꣣ द्य꣡वि꣢ । प꣣वि꣡त्रे꣢ मत्स꣣रो꣡ मदः꣢꣯ ॥१२८४

एषः꣢ । सू꣡र्य꣢꣯म् । अ꣣रोचयत् । प꣡व꣢꣯मानः । अ꣡धि꣢꣯ । द्य꣡वि꣢꣯ । प꣣वि꣡त्रे꣢ । म꣣त्सरः꣢ । म꣡दः꣢꣯ ॥१२८४॥

Mantra without Swara
एष सूर्यमरोचयत्पवमानो अधि द्यवि । पवित्रे मत्सरो मदः ॥१२८४

एषः । सूर्यम् । अरोचयत् । पवमानः । अधि । द्यवि । पवित्रे । मत्सरः । मदः ॥१२८४॥

Samveda - Mantra Number : 1284
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
(एषः) = यह १. (पवमानः) = अपने जीवन को अन्दर व बाहर से पवित्र करता हुआ २. (अधिद्यवि) = मस्तिष्करूप द्युलोक में (सूर्यम्) = ज्ञानरूप सूर्य को (अरोचयत्) = दीप्त करता है। इसका शरीर नीरोग बनता है [बाह्य पवित्रता], मन निर्मल बनता है [अन्तः पवित्रता] और इन दोनों पवित्रताओं के परिणामस्वरूप इसके मस्तिष्करूप द्युलोक में ज्ञान के सूर्य का उदय होता है । ३. (पवित्रे) = उस पवित्र प्रभु में स्नान करता हुआ यह (मत्सरः) = सब लोगों में उल्लास का संचार करनेवाला होता है, लोगों को प्रभु का सन्देश सुनाकर उत्साहित करता है और ४. (मदः) = सदा उल्लासमय जीवनवाला होता है |
Essence
ज्ञान के सूर्योदय के साथ हमारा जीवन उल्लासमय हो ।
Subject
ज्ञान के सूर्य का उदय