Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1282

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- प्रियमेध आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ए꣣ष꣢ दे꣣वः꣡ शु꣢भाय꣣ते꣢ऽधि꣣ यो꣢ना꣣व꣡म꣢र्त्यः । वृ꣣त्रहा꣡ दे꣢व꣣वी꣡त꣢मः ॥१२८२॥

ए꣣षः꣢ । दे꣣वः꣢ । शु꣣भायते । अ꣡धि꣢꣯ । यो꣡नौ꣢꣯ । अ꣡म꣢꣯र्त्यः । अ । म꣣र्त्यः । वृत्रहा꣢ । वृ꣣त्र । हा꣢ । दे꣣ववी꣡त꣢मः । दे꣣व । वी꣡त꣢꣯मः ॥१२८२॥

Mantra without Swara
एष देवः शुभायतेऽधि योनावमर्त्यः । वृत्रहा देववीतमः ॥

एषः । देवः । शुभायते । अधि । योनौ । अमर्त्यः । अ । मर्त्यः । वृत्रहा । वृत्र । हा । देववीतमः । देव । वीतमः ॥१२८२॥

Samveda - Mantra Number : 1282
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
उल्लिखित मन्त्र की भावना के अनुसार (एषः) = यह प्रियमेध १. (देवः) = निर्माणात्मक कार्यों में लगे रहने से देव बनकर (शुभायते) = शोभा को प्राप्त करता है । २. (अधियोनौ) = यह उस ब्रह्माण्ड के मूलाधार ब्रह्म में निवास करता है, सदा प्रभु-चरणों में उपस्थित रहता है, प्रभु से दूर नहीं होता - खाते-पीते सदा उसी का स्मरण करता है ३. परिणामतः (अमर्त्यः) = यह विषयों के पीछे मरनेवाला नहीं होता। इसकी विषयों के प्रति आसक्ति समाप्त हो जाती है । ४. यह (वृत्रहा) = ज्ञान की आवरणभूत इन वासनाओं को नष्ट करनेवाला होता है और ५. (देववीतम:) = अधिक-से-अधिक दिव्य गुणों को प्राप्त [वी] करनेवाला होता है ।
Essence
हम सदा प्रभु में निवास करें, अपने जीवन को शुभ बनाएँ।
 
Subject
शोभा पाना