Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1273

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ए꣣त꣢मु꣣ त्यं꣢꣫ दश꣣ क्षि꣢पो꣣ ह꣡रि꣢ꣳ हिन्वन्ति꣣ या꣡त꣢वे । स्वा꣣युधं꣢ म꣣दि꣡न्त꣢मम् ॥१२७३॥

ए꣣त꣢म् । उ꣣ । त्य꣢म् । द꣡श꣢꣯ । क्षि꣡पः꣢꣯ । ह꣡रि꣢꣯म् । हि꣣न्वन्ति । या꣡त꣢꣯वे । स्वा꣣युध꣢म् । सु꣣ । आयुध꣢म् । म꣣दि꣡न्त꣢मम् ॥१२७३॥

Mantra without Swara
एतमु त्यं दश क्षिपो हरिꣳ हिन्वन्ति यातवे । स्वायुधं मदिन्तमम् ॥

एतम् । उ । त्यम् । दश । क्षिपः । हरिम् । हिन्वन्ति । यातवे । स्वायुधम् । सु । आयुधम् । मदिन्तमम् ॥१२७३॥

Samveda - Mantra Number : 1273
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
(उ) = निश्चय से (त्यम्) = उस (हरिम्) = सब दुःखों का हरण करनेवाले, (सु-आयुधम्) = शत्रुओं के नाश के लिए आयुधरूप (मदिन्तमम्) = हमारे जीवनों को अत्यन्त उल्लासमय बनानेवाले (एतम्) = प्रभु को (यातवे) = यातुओं की निवृति के लिए [मशकाय धूम इति= मच्छरों के हटाने के लिए धुँआ है], राक्षसी वृत्तियों को दूर करने के लिए (दश क्षिपः) = दस अंगुलियाँ [दोनों हाथ ] (हिन्वन्ति) = प्रेरित होती हैं, अर्थात् प्रभु के प्रति की गयी प्रणामाञ्जलि सब आसुर वृत्तियों को दूर भगानेवाली होती है। 
Essence
हम प्रभु को प्रणाम करें, जिससे सब असुर प्रणत हो जाएँ।
Subject
असित की प्रभु के प्रति प्रणामाञ्जलि