Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1272

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ए꣣ष꣡ वसू꣢꣯नि पिब्द꣣नः꣡ परु꣢꣯षा꣣ ययि꣣वा꣡ꣳ अति꣢꣯ । अ꣢व꣣ शा꣡दे꣢षु गच्छति ॥१२७२॥

ए꣣षः꣢ । व꣡सू꣢꣯नि । पि꣣ब्दनः꣢ । प꣡रु꣢꣯षा । य꣣यि꣢वान् । अ꣡ति꣢꣯ । अ꣡व꣢꣯ । शा꣡दे꣢꣯षु । ग꣣च्छति ॥१२७२॥

Mantra without Swara
एष वसूनि पिब्दनः परुषा ययिवाꣳ अति । अव शादेषु गच्छति ॥

एषः । वसूनि । पिब्दनः । परुषा । ययिवान् । अति । अव । शादेषु । गच्छति ॥१२७२॥

Samveda - Mantra Number : 1272
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
(एष:) = यह १. (वसूनि) = [वसु-goods] अच्छाइयों का – उत्तमताओं का (पिब्दन:) = पान करनेवाला है, उत्तमताओं का चयन करनेवाला है । २. (परुषा) = कठोरताओं [cruelty] का (अतिययिवान्) = उल्लंघन करनेवाला बनता है। अपने जीवन में कठोरता को स्थान नहीं देता, क्योंकि दया 'मानवता' की सूचक है और कठोरता 'पशुता' की । Human अवश्य Humane होता है। मनुष्यता दया में निहित है। ३. यह असित अच्छाइयों का ग्रहण करता हुआ क्रूरता को अपने से परे फेंकता हुआ (शादेषु) = [शीयन्ते नश्यन्ति अनेन इति] नष्ट करनेवाली वासनाओं पर (अवगच्छति) = आक्रमण करता है । वासनाओं को नष्ट करके अपने को नाश से बचाता है । 
Essence
१. हमें अच्छाई को अपने अन्दर ग्रहण करना चाहिए, २. कठोरता को दूर करना चाहिए, ३. वासनाओं का अन्त करने के लिए सतत प्रयत्न करना चाहिए ।
 
Subject
अच्छाई का कारण