Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1265

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः स देवरातः कृत्रिमो वैश्वामित्रः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ए꣣ष꣢ उ꣣ स्य꣡ पु꣢रुव्र꣣तो꣡ ज꣢ज्ञा꣣नो꣢ ज꣣न꣢य꣣न्नि꣡षः꣢ । धा꣡र꣢या पवते सु꣣तः꣢ ॥१२६५॥

ए꣣षः꣢ । उ꣣ । स्यः꣢ । पु꣣रुव्रतः꣢ । पु꣣रु । व्रतः꣢ । ज꣣ज्ञानः꣢ । ज꣣न꣡य꣢न् । इ꣡षः꣢꣯ । धा꣡र꣢꣯या । प꣣वते । सुतः꣢ ॥१२६५॥

Mantra without Swara
एष उ स्य पुरुव्रतो जज्ञानो जनयन्निषः । धारया पवते सुतः ॥

एषः । उ । स्यः । पुरुव्रतः । पुरु । व्रतः । जज्ञानः । जनयन् । इषः । धारया । पवते । सुतः ॥१२६५॥

Samveda - Mantra Number : 1265
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
(एषः स्यः) = यह वह परमात्मा (उ) = निश्चय से [प्रभु को 'एष: स्य: ' कहा है कि वह समीप-सेसमीप है और दूर-से-दूर] १. पुरुव्रतः = पालक और पूरक व्रतोंवाला है। यह प्राणिमात्र का पालन कर रहा है । २. (जज्ञान:) = यह सदा लोक-लोकान्तरों का निर्माण करनेवाला है। ३. (जनयन् इषः) = यह प्रेरणाओं को उत्पन्न कर रहा है – जीव को हृदयस्थरूप से सदा कर्त्तव्य की प्रेरणा दे रहा है । ४. यदि एक भक्त उस प्रभु को हृदय में देखने का प्रयत्न करता है तो (सुतः) = आविर्भूत हुआ-हुआ वह प्रभु (धारया) = वेदवाणी द्वारा हमारे जीवनों को (पवते) = पवित्र करता है ।
Essence
हम प्रभु को हृदय में प्रकट करने का प्रयत्न करें, हमें अवश्य उत्तम प्रेरणा प्राप्त होगी ।
 
Subject
प्रेरणाओं को उत्पन्न करता हुआ