Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1264

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- शुनःशेप आजीगर्तिः स देवरातः कृत्रिमो वैश्वामित्रः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ए꣣ष꣢ प्र꣣त्ने꣢न꣣ ज꣡न्म꣢ना दे꣣वो꣢ दे꣣वे꣡भ्यः꣢ सु꣣तः꣢ । ह꣡रिः꣢ प꣣वि꣡त्रे꣢ अर्षति ॥१२६४॥

ए꣣षः꣢ । प्र꣣त्ने꣡न꣢ । ज꣡न्म꣢꣯ना । दे꣣वः꣢ । दे꣣वे꣡भ्यः꣢ । सु꣣तः꣢ । ह꣡रिः꣢꣯ । प꣣वि꣡त्रे꣢ । अ꣣र्षति ॥१२६४॥

Mantra without Swara
एष प्रत्नेन जन्मना देवो देवेभ्यः सुतः । हरिः पवित्रे अर्षति ॥

एषः । प्रत्नेन । जन्मना । देवः । देवेभ्यः । सुतः । हरिः । पवित्रे । अर्षति ॥१२६४॥

Samveda - Mantra Number : 1264
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 10; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
जीवात्मा यदि एक शरीर में अपनी साधना पूर्ण न करके शरीरान्तर को धारण करता है तो (एषः) = यह प्रत्नेन (जन्मना) = जीवन के अत्यन्त शैशवकाल से ही [ from the very early childhood] देव:- दिव्य गुणोंवाला होता हुआ (देवेभ्यः सुतः) = मानो दिव्य गुणों की प्राप्ति के लिए ही उत्पन्न हुआ-हुआ (हरिः) = सभी के दुःखों को हरण करने की वृत्तिवाला (पवित्रे) = पवित्र प्रभु में (अर्षति) = गति करता है ।

पिछले जन्म के संस्कार उसे फिर से इस दिव्य मार्ग पर आगे बढ़ाते हैं । इसका जन्म ही दिव्य गुणों की प्राप्त के लिए हुआ लगता है । यह सदा उस प्रभु में विचरता है और यथासम्भव औरों के कष्टों को कम करने की प्रवृत्तिवाला होता है ।
Essence
हम सदा उस पवित्र प्रभु में विचरने का प्रयत्न करें ।
Subject
पवित्र प्रभु की ओर