Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1239

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- अम्बरीषो वार्षागिर ऋजिश्वा भारद्वाजश्च Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः
Mantra with Swara
व꣣यं꣡ ते꣢ अ꣣स्य꣡ राध꣢꣯सो꣣ व꣡सो꣢र्वसो पुरु꣣स्पृ꣡हः꣢ । नि꣡ नेदि꣢꣯ष्ठतमा इ꣣षः꣡ स्याम꣢꣯ सु꣣म्ने꣡ ते꣢ अध्रिगो ॥१२३९॥

व꣣य꣢म् । ते꣣ । अस्य꣢ । रा꣡ध꣢꣯सः । व꣡सोः꣢꣯ । व꣣सो । पुरुस्पृ꣡हः꣢ । पु꣣रु । स्पृ꣡हः꣢꣯ । नि । ने꣡दि꣢꣯ष्ठतमाः । इ꣣षः꣢ । स्या꣡म꣢꣯ । सु꣣म्ने꣢ । ते꣣ । अध्रिगो ॥१२३९॥

Mantra without Swara
वयं ते अस्य राधसो वसोर्वसो पुरुस्पृहः । नि नेदिष्ठतमा इषः स्याम सुम्ने ते अध्रिगो ॥

वयम् । ते । अस्य । राधसः । वसोः । वसो । पुरुस्पृहः । पुरु । स्पृहः । नि । नेदिष्ठतमाः । इषः । स्याम । सुम्ने । ते । अध्रिगो ॥१२३९॥

Samveda - Mantra Number : 1239
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 9; Khand » 8;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (वसो) = सबको निवास देनेवाले व सबमें बसनेवाले प्रभो ! १. (वयम्) = [वेञ् तन्तुसन्ताने] कर्मतन्तु का विस्तार करनेवाले हम लोग (ते) = आपके (अस्य) = इस (राधसः) = सब कर्मों को सिद्ध करनेवाले (वसोः) = धन की (पुरुस्पृहः) = प्रबल कामना करनेवाले हों । हम क्रिया के द्वारा [वयं] धन को प्राप्त करना चाहें, उस धन को जो कार्यसिद्धि के लिए आवश्यक है [राधस्] और जो धन हमारे उत्तम निवास का कारण है [वसु] । २. हे प्रभो ! हम (ते इषः) = आपकी प्रेरणा के (नेदिष्ठतमाः) = अत्यन्त समीप (निस्याम) = नम्रतापूर्वक हों । नम्रता को हृदय में धारण करते हुए हम आपकी प्रेरणा के समीप ही रहें, उससे दूर न हों । ३. हे (अध्रिगो) = अधृतगमन प्रभो ! जिन आपकी गति व कार्य में कोई भी रुकावट नहीं बन सकता (ते) = उन आपके (सुम्ने) = स्तवन, रक्षण तथा आनन्द में हम (स्याम) = निवास करें । हम प्रभु का स्तवन करनेवाले हों, प्रभु का रक्षण हमें प्राप्त हो और परिणामतः हमारा जीवन आनन्दमय हो ।

यदि ‘सुम्ने' के स्थान में पाठ 'सम्ने' हो तो अर्थ इस प्रकार होगा कि हम आपकी शरण में 'अवैक्लव्य' में स्थित हो । हमारा जीवन शान्तिमय हो ।
Essence
हमें प्रभु का यह धन, जो निवास के लिए आवश्यक है, प्राप्त हो । हम प्रभु की प्रेरणा सुनें तथा प्रभु का स्तवन करते हुए प्रभु के रक्षण को प्राप्त करें | हमारा जीवन शान्त हो ।
Subject
वसु-प्रेरण व स्तवन