Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1221

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- वसिष्ठो मैत्रावरुणिः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
उ꣡द्यस्य꣢꣯ ते꣣ न꣡व꣢जातस्य꣣ वृ꣢꣫ष्णोऽग्ने꣣ च꣡र꣢न्त्य꣣ज꣡रा꣢ इधा꣣नाः꣢ । अ꣢च्छा꣣ द्या꣡म꣢रु꣣षो꣢ धू꣣म꣡ ए꣢षि꣣ सं꣢ दू꣣तो꣡ अ꣢ग्न꣣ ई꣡य꣢से꣣ हि꣢ दे꣣वा꣢न् ॥१२२१॥

उ꣢त् । य꣡स्य꣢꣯ । ते꣣ । न꣡व꣢꣯जातस्य । न꣡व꣢꣯ । जा꣣तस्य । वृ꣡ष्णः꣢꣯ । अ꣡ग्ने꣢꣯ । च꣡र꣢꣯न्ति । अ꣣ज꣡राः꣢ । अ꣣ । ज꣡राः꣢꣯ । इ꣣धानाः꣢ । अ꣡च्छ꣢꣯ । द्याम् । अ꣣रुषः꣢ । धू꣣मः꣢ । ए꣣षि । स꣢म् । दू꣣तः꣢ । अ꣣ग्ने । ई꣡य꣢꣯से । हि । दे꣣वा꣢न् ॥१२२१॥

Mantra without Swara
उद्यस्य ते नवजातस्य वृष्णोऽग्ने चरन्त्यजरा इधानाः । अच्छा द्यामरुषो धूम एषि सं दूतो अग्न ईयसे हि देवान् ॥

उत् । यस्य । ते । नवजातस्य । नव । जातस्य । वृष्णः । अग्ने । चरन्ति । अजराः । अ । जराः । इधानाः । अच्छ । द्याम् । अरुषः । धूमः । एषि । सम् । दूतः । अग्ने । ईयसे । हि । देवान् ॥१२२१॥

Samveda - Mantra Number : 1221
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 9; Khand » 6;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
वैदिक मर्यादा में जब ब्रह्मचारी आचार्याकुल से बाहर आता है तब इस नवजात ब्रह्मचारी को देखने के लिए कितने ही विद्वान् आते हैं, हे अग्ने नेतः ! यस्य ते नवजातस्य-जिस तेरे नवीन उत्पन्न हुए वृष्णः= शक्तिशाली अथवा ज्ञान की वर्षा करनेवाले की अजरा:- जीर्ण न होनेवाली इधाना:ज्ञानदीप्तियाँ चरन्ति प्रजाओं में फैलती हैं, वह तू १. अरुषः = क्रोध से ऊपर उठा हुआ, किसी प्रकार की हिंसा न करनेवाला, २. धूम:= [धू कम्पने] प्रजाओं में हलचल मचा देनेवाला, तपोजनित क्रियाशीलता से उन्हें कम्पित कर देनेवाला, ३. द्याम् अच्छ- ज्ञान के प्रकाश की ओर एषि= जाता है, सदा अपने ज्ञान को बढ़ाने में लगा रहता है । ४. हे अने- प्रकाश फैलानेवाला ! दूतः - अशुभों का निवारण करनेवाला तू हि = निश्चय से ५. देवान् - दिव्य गुणों को समीयसे प्राप्त होता है। अपने अन्दर अधिकाधिक दिव्य गुणों को बढ़ाकर तू औरों में भी दिव्य गुणों की वृद्धि कर सकेगा। 
Essence
हम अग्नि के गुणों को धारण करते हुए लोकहित के लिए ज्ञान का प्रकाश फैलानेवाले बनें । 
Subject
नवजात अग्नि का धूम