Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1214

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- अहमीयुराङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
म꣣हो꣡ नो꣢ रा꣣य꣡ आ भ꣢꣯र꣣ प꣡व꣢मान ज꣣ही꣡ मृधः꣢꣯ । रा꣡स्वे꣢न्दो वी꣣र꣢व꣣द्य꣡शः꣢ ॥१२१४॥

म꣡हः꣢꣯ । नः꣣ । रायः꣢ । आ । भ꣣र । प꣡व꣢꣯मान । ज꣡हि꣢ । मृ꣡धः꣢꣯ । रा꣡स्व꣢꣯ । इ꣣न्दो । वीर꣡व꣢त् । य꣡शः꣢꣯ ॥१२१४॥

Mantra without Swara
महो नो राय आ भर पवमान जही मृधः । रास्वेन्दो वीरवद्यशः ॥

महः । नः । रायः । आ । भर । पवमान । जहि । मृधः । रास्व । इन्दो । वीरवत् । यशः ॥१२१४॥

Samveda - Mantra Number : 1214
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 9; Khand » 5;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (पवमान) = हम सबके जीवनों को पवित्र करनेवाले प्रभो ! १. (नः) = हमें (महे राये) = महत्त्वपूर्ण ऐश्वर्य के लिए, अर्थात् ज्ञानरूप ऐश्वर्य के लिए (आभर) = प्राप्त कराइए । २. इस ज्ञानैश्वर्य की प्राप्ति के लिए ही (मृधः) = कामादि हिंसक वृत्तियों को (जही) = नष्ट कीजिए । ३. हे (इन्दो) = परमैश्वर्यशाली, सर्वशक्तिमन् प्रभो! [इदि परमैश्वर्ये, इन्द्=to be powerful] (वीरवद् यशः) = वीरता से युक्त यश - हमें दीजिए । (रास्व) = काम ज्ञान पर सदा आवरण डाले रखता है। इस आवरण के हटने पर ही ज्ञान की दीप्ति चमकती है और मनुष्य उत्तम लोकहित के कार्यों को करता हुआ वीरता पूर्ण यश को प्राप्त करता है।
Essence
हम ज्ञानी बनें, काम पर विजय पाएँ, वीर व यशस्वी हों ।
Subject
ज्ञान, काम विजय, वीरता व यश