Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1208

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- उचथ्य आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ꣡ प꣢वस्व मदिन्तम प꣣वि꣢त्रं꣣ धा꣡र꣢या कवे । अ꣣र्क꣢स्य꣣ यो꣡नि꣢मा꣣स꣡द꣢म् ॥१२०८॥

आ । प꣣वस्व । मदिन्तम । पवि꣡त्र꣢म् । धा꣡र꣢꣯या । क꣣वे । अ꣣र्क꣡स्य꣢ । यो꣡नि꣢꣯म् । आ꣣स꣡द꣢म् । आ । सदम् ॥१२०८॥

Mantra without Swara
आ पवस्व मदिन्तम पवित्रं धारया कवे । अर्कस्य योनिमासदम् ॥

आ । पवस्व । मदिन्तम । पवित्रम् । धारया । कवे । अर्कस्य । योनिम् । आसदम् । आ । सदम् ॥१२०८॥

Samveda - Mantra Number : 1208
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 9; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (मदिन्तम) = हे अत्यन्त प्रसन्न स्वभाववाले ! (कवे) = क्रान्तदर्शिन् ! तू (अर्कस्य) = अर्चनीय प्रभु के (योनिम्) = पवित्र स्थान को (आसदम्) = प्राप्त करने के लिए (धारया) = वेदवाणी के अनुसार [ धारा-वाणीवेदवाणी] (आपवस्व) = सर्वथा गतिशील हो । तेरे सारे कार्य वेद के निर्देशानुसार हों । 
Essence
मनुष्य को चाहिए कि १. वह प्रसन्न मनोवृत्तिवाला हो, २. क्रान्तदर्शी बने, तत्त्व का द्रष्टा हो तथा ३. वेद के अनुसार अपने जीवन को बनाए, तभी वह उस अर्चनीय प्रभु के पवित्र स्थान को प्राप्त करेगा ।
Subject
वेदवाणी के अनुसार चलना