Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1207

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- उचथ्य आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣢व्या꣣ वा꣢रैः꣣ प꣡रि꣢ प्रि꣣य꣡ꣳ ह꣢꣯रिꣳ हिन्व꣣न्त्य꣡द्रि꣢भिः । प꣡व꣢मानं मधु꣣श्चु꣡त꣢म् ॥१२०७॥

अ꣡व्याः꣢꣯ । वा꣡रैः꣢꣯ । प꣡रि꣢꣯ । प्रि꣣य꣢म् । ह꣡रि꣢꣯म् । हि꣣न्वन्ति । अ꣡द्रि꣢꣯भिः । अ । द्रि꣣भिः । प꣡व꣢꣯मानम् । म꣣धुश्चु꣡त꣢म् । म꣣धु । श्चु꣡त꣢꣯म् ॥१२०७॥

Mantra without Swara
अव्या वारैः परि प्रियꣳ हरिꣳ हिन्वन्त्यद्रिभिः । पवमानं मधुश्चुतम् ॥

अव्याः । वारैः । परि । प्रियम् । हरिम् । हिन्वन्ति । अद्रिभिः । अ । द्रिभिः । पवमानम् । मधुश्चुतम् । मधु । श्चुतम् ॥१२०७॥

Samveda - Mantra Number : 1207
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 9; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
(अव्या) = वासनाओं के आक्रमण से अपने को बचाने के द्वारा (वारैः) = काम-क्रोधादि के निवारणों से तथा (अद्रिभिः) = दृढ़ संकल्पों से ‘उचथ्य' लोग उस प्रभु को (परिहिन्वन्ति) = सर्वथा प्राप्त होते हैं, जो प्रभु १. (प्रियम्) = प्रिय हैं-आत्मिक तृप्ति देनेवाले हैं [प्री-तर्पणे] २. (पवमानम्) = हमारे जीवनों को पवित्र करनेवाले हैं— तथा ३. (मधुश्चुतम्) = माधुर्य को क्षरित करनेवाले हैं- हमारे जीवनों में रस का उत्पादन करनेवाले हैं । ४. (हरिम्) = सब दुःखों का हरण करनेवाले हैं।
Essence
वे प्रभु हमारे जीवनों में तृप्ति, पवित्रता व रस का संचार करते हैं। उस प्रभु की प्राप्ति का उपाय १. वाणी, मन आदि का अशुभवृत्तियों से रक्षण २. वासनाओं का निवारण तथा ३. प्रभु-प्राप्ति का दृढ़ संकल्प है।
Subject
प्रभु-प्राप्ति के तीन उपाय