Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1203

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
आ꣡ प꣢वमान धारया र꣣यि꣢ꣳ स꣣ह꣡स्र꣢वर्चसम् । अ꣣स्मे꣡ इ꣢न्दो स्वा꣣भु꣡व꣢म् ॥१२०३॥

आ । प꣣वमान । धारय । र꣢यिम् । स꣣ह꣡स्र꣢वर्चसम् । स꣣ह꣡स्र꣢ । व꣣र्च꣡सम् । अस्मे꣡इति꣢ । इ꣣न्दो । स्वाभु꣡व꣢म् । सु꣣ । आभु꣡व꣢म् ॥१२०३॥

Mantra without Swara
आ पवमान धारया रयिꣳ सहस्रवर्चसम् । अस्मे इन्दो स्वाभुवम् ॥

आ । पवमान । धारय । रयिम् । सहस्रवर्चसम् । सहस्र । वर्चसम् । अस्मेइति । इन्दो । स्वाभुवम् । सु । आभुवम् ॥१२०३॥

Samveda - Mantra Number : 1203
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 9; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (पवमान) = हमारे जीवनों को पवित्र करनेवाले (इन्दो) = परमैश्वर्य-सम्पन्न प्रभो! आप (अस्मे) = हममें (स्वाभुवम्) = [स्व=आत्मा भू-होना] आत्मा में होनेवाले, अर्थात् आत्मविषयक (सहस्रवर्चसम्) = आत्मज्ञान के द्वारा अनन्त शक्ति देनेवाले (रयिम्) = ज्ञान-धन को (आधारय) = सर्वथा धारण कराइए । आपकी कृपा से हम आत्मज्ञान प्राप्त करें, और अपनी महिमा का अनुभव करें। आत्मज्ञान हमें निर्भीक व शक्ति-सम्पन्न बनाता है । आत्मज्ञान प्राप्त करके मनुष्य मृत्यु आदि के भय से ऊपर उठ जाता है|
Essence
हम आत्मज्ञान प्राप्त करके अभय बन जाएँ।
Subject
आत्मज्ञान व अभय