Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1196

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
सो꣡मा꣢ असृग्र꣣मि꣡न्द꣢वः सु꣣ता꣢ ऋ꣣त꣢स्य꣣ धा꣡र꣢या । इ꣡न्द्रा꣢य꣣ म꣡धु꣢मत्तमाः ॥११९६॥

सो꣡माः꣢꣯ । अ꣣सृग्रम् । इ꣡न्द꣢꣯वः । सु꣣ताः꣢ । ऋ꣣त꣡स्य꣢ । धा꣡र꣢꣯या । इ꣡न्द्रा꣢꣯य । म꣡धु꣢꣯मत्तमाः ॥११९६॥

Mantra without Swara
सोमा असृग्रमिन्दवः सुता ऋतस्य धारया । इन्द्राय मधुमत्तमाः ॥

सोमाः । असृग्रम् । इन्दवः । सुताः । ऋतस्य । धारया । इन्द्राय । मधुमत्तमाः ॥११९६॥

Samveda - Mantra Number : 1196
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 9; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
(इन्द्राय) = उस परमैश्वर्यशाली प्रभु के लिए (असृग्रम्) = भेजे जाते हैं [विसृज्यन्ते] या बनाये जाते हैं, अर्थात् ये प्रभु को प्राप्त करनेवाले होते हैं । कौन– १. (सोमाः) = सौम्य स्वभाववाले पुरुष, अथवा शक्ति का पान करनेवाले अतएव शक्ति के पुञ्ज बने हुए पुरुष २. (इन्दवः) = संसार में वासनाओं से चल रहे संग्राम में शक्तिशाली प्रमाणित होनेवाले ३. (ऋतस्य) = सब सत्यविद्याओं की (धारया) = वेदवाणी से (सुता:) = निष्पादित व संस्कृत जीवनवाले व्यक्ति । वेद के अनुसार अपने जीवनों को बनानेवाले ४. (मधुमत्तमाः) = अत्यन्त मधुर । जिनकी वाणी के अग्रभाग में मधु है – जिनकी वाणी के मूल में मधु है, जिनका जीवन मधुमय हो गया है । 
Essence
हम सौम्य, शक्तिशाली, वेदानुकूल जीवनवाले, माधुर्यमय बनकर प्रभु को प्राप्त करें ।
Subject
सौम्यता, शक्ति, वैदिक जीवन, माधुर्य