Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1191

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣡त्या꣢ हिया꣣ना꣢꣫ न हे꣣तृ꣢भि꣣र꣡सृ꣢ग्रं꣣ वा꣡ज꣢सातये । वि꣢꣫ वार꣣म꣡व्य꣢मा꣣श꣡वः꣢ ॥११९१॥

अ꣡त्याः꣢꣯ । हि꣣यानाः꣢ । न । हे꣣तृ꣡भिः꣢ । अ꣡सृ꣢꣯ग्रम् । वा꣡ज꣢꣯सातये । वा꣡ज꣢꣯ । सा꣣तये । वि꣢ । वा꣡र꣢꣯म् । अ꣡व्य꣢꣯म् । आ꣣श꣡वः꣢ ॥११९१॥

Mantra without Swara
अत्या हियाना न हेतृभिरसृग्रं वाजसातये । वि वारमव्यमाशवः ॥

अत्याः । हियानाः । न । हेतृभिः । असृग्रम् । वाजसातये । वाज । सातये । वि । वारम् । अव्यम् । आशवः ॥११९१॥

Samveda - Mantra Number : 1191
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 9; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
(हेतृभिः) = प्रेरकों [हि गतौ] से (हियाना:) = प्रेरित किये जाते हुए मनुष्य (अत्याः न) = घोड़े-जैसी (वाजसातये) = [वाज= speed] शीघ्र गतिवाले होते हैं । अत्य=घोड़े स्वयं भी [अत=गमन] गतिशील हैं । जब ये उत्तम नियन्ता से प्रेरित होते हैं तब और अधिक तीव्रगति को प्राप्त करते हैं । इसी प्रकार (आशवः) = शीघ्रता से अपने नियत कार्यों में व्याप्त होनेवाले, अपने कार्य को स्फूर्ति से करनेवाले सज्जन लोग (हेतृभिः) = उत्तम प्रेरक विद्वानों के द्वारा (हियाना:) = प्रेरित होते हुए (अव्यम्) = उस [अव=दीप्ति, रक्षण] देदीप्यमान-आसुर वृत्तियों से रक्षण में सर्वोत्तम साधनभूत (वारम्) = वरणीय प्रभु की ओर (वाजसातये) = शक्ति प्राप्ति के मार्ग पर तीव्रता से आगे बढ़ते हैं ।
Essence
उत्तम प्रेरक विद्वानों को प्राप्त कर हम प्रभु प्राप्ति के मार्ग पर अग्रसर हों ।
Subject
उत्तम प्रेरकों की प्रेरणा