Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1184

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
म꣣घो꣢न꣣ आ꣡ प꣢वस्व नो ज꣣हि꣢꣫ विश्वा꣣ अ꣢प꣣ द्वि꣡षः꣢ । इ꣢न्दो꣣ स꣡खा꣢य꣣मा꣡ वि꣡श ॥११८४॥

मघो꣡नः꣢ । आ । प꣣वस्व । नः । जहि꣢ । वि꣡श्वाः꣢꣯ । अ꣡प꣢꣯ । द्वि꣡षः꣢꣯ । इ꣡न्दो꣢꣯ । स꣡खा꣢꣯यम् । स । खा꣣यम् । आ꣢ । वि꣣श ॥११८४॥

Mantra without Swara
मघोन आ पवस्व नो जहि विश्वा अप द्विषः । इन्दो सखायमा विश ॥

मघोनः । आ । पवस्व । नः । जहि । विश्वाः । अप । द्विषः । इन्दो । सखायम् । स । खायम् । आ । विश ॥११८४॥

Samveda - Mantra Number : 1184
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 9; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. (मघोनः) = महनीय ज्ञानैश्वर्यवाले [मघ- ऐश्वर्य] तथा उत्तम यज्ञोंवाले [मघ= मख] हे (इन्दो) = सोम अथवा परमैश्वर्यवाले प्रभो! (नः) = हमें (आपवस्व) = पवित्र कीजिए । २. इस पवित्रता के लिए ही (विश्वा द्विषः) = हममें प्रवेश करनेवाली द्वेष- भावनाओं को (अपजहि) = नष्ट कर दीजिए | हमारे मन के मैल का स्वरूप ये राग-द्वेष ही तो हैं । ३. इस प्रकार हमारे जीवनों को निर्मल बनाकर हे प्रभो! (सखायम्) = आपके मित्र हममें (आविश) = प्रवेश कीजिए । इस प्रकार जीवन में प्रभु प्राप्ति का क्रम यह है—१. सोम-रक्षा द्वारा ज्ञान व यज्ञमय जीवन बिताते हुए पवित्र बनना और २. द्वेषों से दूर होना ।
Essence
पवित्रता, द्वेष-शून्यता व प्रभु-प्राप्ति - इस सीढ़ी का हम आक्रमण करें ।
Subject
पवित्रता, द्वेष-शून्यता व प्रभु-प्रवेश