Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1180

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
इ꣡न्द्र꣢स्य सोम꣣ रा꣡ध꣢से पुना꣣नो꣡ हार्दि꣢꣯ चोदय । दे꣣वा꣢नां꣣ यो꣡नि꣢मा꣣स꣡द꣢म् ॥११८०॥

इ꣡न्द्र꣢꣯स्य । सो꣣म । रा꣡ध꣢꣯से । पु꣣नानः꣢ । हा꣡र्दि꣢꣯ । चो꣣दय । देवा꣡ना꣢म् । यो꣡नि꣢꣯म् । आ꣣स꣡द꣢म् । आ꣣ । स꣡द꣢꣯म् ॥११८०॥

Mantra without Swara
इन्द्रस्य सोम राधसे पुनानो हार्दि चोदय । देवानां योनिमासदम् ॥

इन्द्रस्य । सोम । राधसे । पुनानः । हार्दि । चोदय । देवानाम् । योनिम् । आसदम् । आ । सदम् ॥११८०॥

Samveda - Mantra Number : 1180
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 5; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 9; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (सोम) = सोम! १. (इन्द्रस्य) = परमैश्वर्यशाली प्रभु की (राधसे) = सिद्धि के लिए - प्राप्ति के लिए २. (पुनान:) = हमारे जीवनों को पवित्र करता हुआ तू ३. (हार्दि) = प्रबल कामना को (चोदय) = प्रेरित कर । प्रबल इच्छा के बिना हम कभी प्रभु को प्राप्त कर सकेंगे, इस बात की सम्भावना नहीं है। प्रबल इच्छा होने पर हम अपने जीवनों को पवित्र बनाने के लिए प्रयत्नशील होंगे । प्रभु के स्वागत के लिए पवित्रीकरण आवश्यक है। अपवित्र हृदय में प्रभु का प्रकाश थोड़े ही होगा? यह प्रबल इच्छा व पवित्रीकरण सोम की रक्षा से ही सम्भव है । सुरक्षित सोम हमें पवित्र करते हैं और हममें प्रभुप्राप्ति की प्रबल कामना व उत्साह को पैदा करते हैं । इस प्रकार उत्साहयुक्त हो मैं आगे और आगे बढ़ता हूँ और (देवानाम्) = देवताओं के (योनिम्) = स्थान को (आसदम्) = प्राप्त करता हूँ । मेरा जीवन दिव्य बनता है, उत्तम गुणों का मैं लाभ करता हूँ ।
Essence
रभु-प्राप्ति के लिए १. पवित्रता २. प्रबल कामना व उत्साह तथा ३. दिव्य गुणों का अर्जन आवश्यक है ।
Subject
पवित्रता, प्रबल कामना, दिव्य गुणार्जन