Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1170

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- नृमेध आङ्गिरसः Chhand- ककुप् Swara- ऋषभः
Mantra with Swara
त्व꣡ꣳ हि नः꣢꣯ पि꣣ता꣡ व꣢सो꣣ त्वं꣢ मा꣣ता꣡ श꣢तक्रतो ब꣣भू꣡वि꣢थ । अ꣡था꣢ ते सु꣣म्न꣡मी꣢महे ॥११७०॥

त्वम् । हि । नः꣣ । पिता꣢ । व꣣सो । त्व꣢म् । मा꣣ता꣢ । श꣣तक्रतो । शत । क्रतो । बभू꣡वि꣢थ । अ꣡थ꣢꣯ । ते꣡ । सुम्न꣢म् । ई꣢महे ॥११७०॥

Mantra without Swara
त्वꣳ हि नः पिता वसो त्वं माता शतक्रतो बभूविथ । अथा ते सुम्नमीमहे ॥

त्वम् । हि । नः । पिता । वसो । त्वम् । माता । शतक्रतो । शत । क्रतो । बभूविथ । अथ । ते । सुम्नम् । ईमहे ॥११७०॥

Samveda - Mantra Number : 1170
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 8; Khand » 6;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (वसो) = सबको उत्तम निवास देनेवाले प्रभो ! (त्वं हि) = निश्चय से आप ही (न:) = हमारे (पिता) = पालन व रक्षण करनेवाले (बभूविथ) = हो । घर में पिता का रक्षण ठीक होने पर ही सबका निवास उत्तम होता है। हम सबके पिता वे प्रभु हैं, उन्हीं की कृपा से हमारा निवास उtत्तम होगा । हे (शतक्रतो) = अनन्त प्रज्ञान व कर्मोंवाले प्रभो! (त्वम्) = आप ही (माता) = सबका निर्माण करनेवाले हो । घर का निर्माण भी तो उस प्रभु की कृपा से होता है, अत: वे प्रभु ही हमारी माता हैं। (अथ) = अब (ते) = आपके ही (सुम्नम्) = स्तोत्रों को (ईमहे) = चाहते हैं । आपसे रक्षा चाहते हुए आनन्द प्राप्ति के लिए प्रार्थना करते हैं [सुम्नम्=Hymn; protection, joy]।
Essence
प्रभु ही हमारी माता व पिता हैं । उन्हीं से हम रक्षण के लिए प्रार्थना करते हैं । 
Subject
पिता व माता