Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1164

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- भृगुर्वारुणिर्जमदग्निर्भार्गवो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
य꣡ आ꣢र्जी꣣के꣢षु꣣ कृ꣡त्व꣢सु꣣ ये꣡ मध्ये꣢꣯ प꣣꣬स्त्या꣢꣯नाम् । ये꣢ वा꣣ ज꣡ने꣢षु प꣣ञ्च꣡सु꣢ ॥११६४॥

ये । आ꣣जीर्के꣡षु꣢ । कृ꣡त्व꣢꣯सु । ये । म꣡ध्ये꣢꣯ । प꣣꣬स्त्या꣢नाम् । ये । वा꣣ । ज꣡ने꣢꣯षु । प꣣ञ्च꣡सु꣢ ॥११६४॥

Mantra without Swara
य आर्जीकेषु कृत्वसु ये मध्ये पस्त्यानाम् । ये वा जनेषु पञ्चसु ॥

ये । आजीर्केषु । कृत्वसु । ये । मध्ये । पस्त्यानाम् । ये । वा । जनेषु । पञ्चसु ॥११६४॥

Samveda - Mantra Number : 1164
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 8; Khand » 5;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
(ये) = जो सोम १. (आर्जीकेषु) = सरल व्यक्तियों में निवास करते हैं, अर्थात् कुटिल जीवन में ब्रह्मचर्य का पालन कठिन होता है । २. (कृत्वसु) = जो सोम कर्म करनेवालों में रहते हैं, अर्थात् कर्मशील व्यक्ति वासनाओं से बचे रहने के कारण सोम की रक्षा कर पाता है। ३. (ये) = जो सोम (पस्त्यानां मध्ये) = घरों के मध्य में निवास करते हैं, अर्थात् सोम में सुरक्षित रहते हैं। जो व्यक्ति पतिव्रत व पत्नीव्रत को निभाते हुए घरों में ही निवास करते हैं - वासनाओं की पूर्ति के लिए इधर-उधर भटकते नहींअपने जीवनों को क्लब का जीवन नहीं बनाते । ४. (वा) = अथवा (ये) = जो सोम (पञ्चषु) = [पचि विस्तारे] अपना विस्तार व विकास करनेवाले मनुष्यों में रहते हैं । जब मनुष्य का लक्ष्य विकास हो जाता है तब उसके लिए सोम-रक्षा सुगम हो जाती है ।
Essence
१. सरलता, २. क्रियाशीलता, ३. गृहजीवन व ४. जीवन विकास – ये सोम-रक्षा के साधन हैं।
Subject
सोम की रक्षा किनमें ?