Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1154

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- सिकता निवावरी Chhand- जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
आ꣡ नः꣢ सोम सं꣣य꣡तं꣢ पि꣣प्यु꣢षी꣣मि꣢ष꣣मि꣢न्दो꣣ प꣡व꣢स्व꣣ प꣡व꣢मान ऊ꣣र्मि꣡णा꣢ । या꣢ नो꣣ दो꣡ह꣢ते꣣ त्रि꣢꣫रह꣣न्न꣡स꣢श्चुषी क्षु꣣म꣡द्वाज꣢꣯व꣣न्म꣡धु꣢मत्सु꣣वी꣡र्य꣢म् ॥११५४॥

आ꣢ । नः꣣ । सोम । सं꣡यत꣢म् । स꣣म् । य꣡त꣢꣯म् । पि꣣प्यु꣡षी꣢म् । इ꣡ष꣢꣯म् । इ꣡न्दो꣢꣯ । प꣡व꣢꣯स्व । प꣡व꣢꣯मानः । ऊ꣣र्मि꣡णा꣢ । या । नः꣣ । दो꣡ह꣢꣯ते । त्रिः । अ꣡ह꣢꣯न् । अ । ह꣣न् । अ꣡स꣢꣯श्चुषी । अ । स꣣श्चुषी । क्षुम꣢त् । वा꣡ज꣢꣯वत् । म꣡धु꣢꣯मत् । सु꣣वी꣡र्य꣢म् । सु꣣ । वी꣡र्य꣢꣯म् ॥११५४॥

Mantra without Swara
आ नः सोम संयतं पिप्युषीमिषमिन्दो पवस्व पवमान ऊर्मिणा । या नो दोहते त्रिरहन्नसश्चुषी क्षुमद्वाजवन्मधुमत्सुवीर्यम् ॥

आ । नः । सोम । संयतम् । सम् । यतम् । पिप्युषीम् । इषम् । इन्दो । पवस्व । पवमानः । ऊर्मिणा । या । नः । दोहते । त्रिः । अहन् । अ । हन् । असश्चुषी । अ । सश्चुषी । क्षुमत् । वाजवत् । मधुमत् । सुवीर्यम् । सु । वीर्यम् ॥११५४॥

Samveda - Mantra Number : 1154
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 8; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (इन्दो) = शक्ति देनेवाले (पवमान) = पवित्रता का सम्पादन करनेवाले सोम! (नः) = हमें (ऊर्मिणा) = अपनी ऊर्ध्वगति के द्वारा (संयतम्) = आत्मसंयमवाली (पिप्युषीम्) = वृद्धि की कारणभूत (इषम्) = प्रेरणा (आपवस्व) = प्राप्त कराओ। शरीर में उत्पन्न शक्ति जब ऊर्ध्वगतिवाली होती है तब हमारे मनों में आत्मसंयम की भावना को जन्म देती है और शरीर की वृद्धि का कारण बनती है। सोम की ऊर्ध्वगति से होनेवाली (या) = जो प्रेरणा (असश्चुषी) = पराजित न होती हुई (न:) = हमारे अन्दर (अहन्) = दिन में (त्रि:) = तीन बार, अर्थात् प्रातः, मध्याह्न व सायं (सुवीर्यम्) = उस उत्तम शक्ति को (दोहते) = प्रपूरित करती है, जो शक्ति (क्षुमत्) = उत्तम अन्नवाली है, अर्थात् सात्त्विक अन्न के सेवन से उत्पन्न हुई है, (वाजवत्) = उत्तम ज्ञान व क्रियावाली है—जिस शक्ति से हमारे अन्दर उत्तम ज्ञान व कर्म की भावना उत्पन्न होती है और (मधुमत्) = जो शक्ति माधुर्यवाली है, अर्थात् इस प्रेरणा को प्राप्त करके हम सात्त्विक अन्न का सेवन करते हैं, उत्तम ज्ञानवाले बनते हैं, उत्तम क्रियावाले होते हैं और हमारा जीवन माधुर्य को लिये हुए होता है।
Essence
सुरक्षित सोम हमें उत्तम प्रेरणा प्राप्त करानेवाला हो ।
Subject
उत्तम प्रेरणा