Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1132

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प꣡व꣢मानो अ꣣भि꣢꣫ स्पृधो꣣ वि꣢शो꣣ रा꣡जे꣢व सीदति । य꣡दी꣢मृ꣣ण्व꣡न्ति꣢ वे꣣ध꣡सः꣢ ॥११३२॥

प꣡व꣢꣯मानः । अ꣣भि꣢ । स्पृ꣡धः꣢꣯ । वि꣡शः꣢꣯ । रा꣡जा꣢꣯ । इ꣣व । सीदति । य꣢त् । ई꣣म् । ऋण्व꣡न्ति꣢ । वे꣣ध꣡सः꣢ ॥११३२॥

Mantra without Swara
पवमानो अभि स्पृधो विशो राजेव सीदति । यदीमृण्वन्ति वेधसः ॥

पवमानः । अभि । स्पृधः । विशः । राजा । इव । सीदति । यत् । ईम् । ऋण्वन्ति । वेधसः ॥११३२॥

Samveda - Mantra Number : 1132
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 8; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
(यत् ईम्) = वस्तुतः जब (वेधसः) = ज्ञानी लोग (ऋण्वन्ति) = प्रभु को प्राप्त करते हैं तब (पवमानः) = वे पवित्र करनेवाले प्रभु (स्पृधः) = [स्पर्ध संघर्षे] हमारे साथ संघर्ष करनेवाले (विशः) = हमारे न चाहते हुए भी हमारे अन्दर प्रवेश कर जानेवाले काम-क्रोध आदि को (अभिसीदति) = [अभिषादयति] नष्ट कर देते हैं। हम प्रभु की शरण में जाते हैं और प्रभु हमारे इन शत्रुओं को नष्ट कर देते हैं। प्रभु की शक्ति के बिना हम इन शत्रुओं को जीत ही कहाँ सकते थे? हमारे साथ स्पर्धा में तो ये हमारे अन्दर घुस ही आते हैं। प्रभु हमारे साथ होते हैं तो ये हमपर आक्रमण नहीं कर पाते । आक्रमण करते हैं तो पराजित होते हैं । (इव) = उसी प्रकार जैसे (राजा) = एक राजा विद्रोहियों को दबा देते हैं । ये प्रभु भी मेरे विरोधियों को कुचल देते हैं ।
Essence
मैं प्रभु को प्राप्त करता हूँ - प्रभु मेरे शत्रुओं को शान्त करते हैं ।
Subject
प्रभु क्या करते हैं ?