Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1131

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प꣢रि꣣ य꣡त्काव्या꣢꣯ क꣣वि꣢र्नृ꣣म्णा꣡ पु꣢ना꣣नो꣡ अर्ष꣢꣯ति । स्व꣢꣯र्वा꣣जी꣡ सि꣢षासति ॥११३१॥

प꣡रि꣢꣯ । यत् । का꣡व्या꣢꣯ । क꣣विः꣢ । नृ꣣म्णा꣢ । पु꣣नानः꣢ । अ꣡र्ष꣢꣯ति । स्वः꣢ । वा꣣जी꣢ । सि꣣षासति ॥११३१॥

Mantra without Swara
परि यत्काव्या कविर्नृम्णा पुनानो अर्षति । स्वर्वाजी सिषासति ॥

परि । यत् । काव्या । कविः । नृम्णा । पुनानः । अर्षति । स्वः । वाजी । सिषासति ॥११३१॥

Samveda - Mantra Number : 1131
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 8; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
(यत्) = जब यह ‘असित् काश्यप, देवल' प्रस्तुत मन्त्र का ऋषि १. (कवि:) = क्रान्तदर्शी बनता है । सब वस्तुओं के तत्त्व को समझने का प्रयत्न करता है, २. (नृम्णा) = धनों को (पुनानः) = पवित्र करता है । प्रत्येक बात को तात्त्विक दृष्टि से सोचनेवाला व्यक्ति अपवित्र साधनों से धन कमाएगा ही नहीं । ३. यह (काव्या) = वेदज्ञानों को (परि अर्षति) = पूर्णरूप से प्राप्त होता है । तात्त्विक दृष्टिवाला व्यक्ति ज्ञानप्रधान जीवन बिताता ही है । ४. ज्ञान-प्रधान जीवन बिताता हुआ यह (वाजी) = शक्तिशाली व क्रियाशील बनता है [वाज=शक्ति, वज गतौ] ।५. यह व्यक्ति वस्तुतः (स्वः) = अपने मोक्षसुख को भी (सिषासति) = बाँटना चाहता है। स्वयं अकेला मुक्त भी नहीं होना चाहता।
Essence
मुक्ति का मार्ग यही है कि मनुष्य – १. कवि-क्रान्तदर्शी बने, २. पवित्र धनवाला हो, ३. वेदज्ञान को प्राप्त करे, ४. शक्तिशाली व क्रियाशील हो, ५. सभी को सुख प्राप्त कराना चाहे ।
 
Subject
मोक्ष का मार्ग