Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1124

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣢प꣣ द्वा꣡रा꣢ मती꣣नां꣢ प्र꣣त्ना꣡ ऋ꣢ण्वन्ति का꣣र꣡वः꣢ । वृ꣢ष्णो꣣ ह꣡र꣢स आ꣣य꣡वः꣢ ॥११२४॥

अ꣡प꣢꣯ । द्वा꣡रा꣢꣯ । म꣣तीना꣢म् । प्र꣣त्नाः꣢ । ऋ꣣ण्वन्ति । कार꣡वः꣢ । वृ꣡ष्णः꣢꣯ । ह꣡र꣢꣯से । आ꣣य꣡वः꣢ ॥११२४॥

Mantra without Swara
अप द्वारा मतीनां प्रत्ना ऋण्वन्ति कारवः । वृष्णो हरस आयवः ॥

अप । द्वारा । मतीनाम् । प्रत्नाः । ऋण्वन्ति । कारवः । वृष्णः । हरसे । आयवः ॥११२४॥

Samveda - Mantra Number : 1124
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 8; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
(प्रत्नाः) = प्रथमाश्रम में विद्या का अध्ययन करनेवाले [ऋ० ६.२.४ – द०] अथवा प्रत्न=पतन=अपनी शक्तियों का खूब विस्तार करनेवाले (कारवः) = [कारु: शिल्पिनि कारके] प्रत्येक कार्य को बड़े कलापूर्ण ढंग से करनेवाले (आयवः) = [एति] गतिशील मनुष्य (वृष्णः) = शक्तिशाली, सब सुखों की वर्षा करनेवाले प्रभु को हरसे प्राप्त करने के लिए (मतीनाम्) = बुद्धियों के द्वारा द्वारों को (अप ऋण्वन्ति) = खोल देते हैं । वस्तुतः बुद्धि के विकास से ही प्रभु का दर्शन होता है । सूक्ष्म बुद्धि से ही आत्मा का ग्रहण होता है । =

बुद्धि के विकास के लिए आवश्यक है कि १. हम प्रथमाश्रम में विद्या का खूब अध्ययन करें और शक्तियों का विकास करें, २. साथ ही प्रत्येक कार्य को सौन्दर्य से करने का अभ्यास करें, ३. क्रियाशील जीवनवाले होकर बुद्धि का विकास करेंगे तो अवश्य प्रभु का दर्शन करेंगे ।
Essence
हम बुद्धि के द्वारों को खोलें और प्रभु का दर्शन करें।
Subject
बुद्धि के द्वारों का उद्घाटन