Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1120

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
हि꣣न्वाना꣢सो꣣ र꣡था꣢ इव दधन्वि꣣रे꣡ गभ꣢꣯स्त्योः । भ꣡रा꣢सः का꣣रि꣡णा꣢मिव ॥११२०॥

हिन्वाना꣡सः꣢ । र꣡थाः꣢꣯ । इ꣣व । दधन्विरे꣢ । ग꣡भ꣢꣯स्त्योः । भ꣡रा꣢꣯सः । का꣣रि꣡णा꣢म् । इ꣣व ॥११२०॥

Mantra without Swara
हिन्वानासो रथा इव दधन्विरे गभस्त्योः । भरासः कारिणामिव ॥

हिन्वानासः । रथाः । इव । दधन्विरे । गभस्त्योः । भरासः । कारिणाम् । इव ॥११२०॥

Samveda - Mantra Number : 1120
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 8; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. ये ‘अ-सित’ [विषयों से अबद्ध पुरुष ] (हिन्वानासः) = प्रेर्यमाण- आगे और आगे चलते हुए (रथाः इव) = रथों के समान हैं। जैसे सारथि से प्रेरित रथ आगे बढ़ता चलता है, उसी प्रकार यह असित अन्त:स्थित प्रभु से प्रेरित होता हुआ आगे बढ़ता चलता है । २. ये ‘काश्यप' (गभस्त्योः) = सूर्य व चन्द्र-किरणों के समान ज्ञान-विज्ञान की किरणों में (दधन्विरे) = स्थापित होते हैं। अपने ज्ञान को उत्तरोत्तर बढ़ाते हुए ये ज्ञान के सूर्य से देदीप्यमान होते हैं । ३. ये 'देवल' (कारिणाम् इव) = कलाकारों की भाँति (भरासः) = अपने अन्दर उत्तम गुणों को भरनेवाले होते हैं। एक कलाकार अपनी कला में— अपने से बनाये जाते हुए चित्र में विचित्र रंगों को भरता है, उसी प्रकार यह देवल अपने जीवनचित्र में विविध गुणरूप रंगों को भरता है । कलाकार चित्र को सुन्दर बनाता है — यह देवल अपने जीवन के चित्र को सुन्दर बनाता है ।
Essence
हम आगे बढ़ें, ज्ञान-किरणों में धारित हों, जीवन- चित्र में गुणों के रंगों को भरें । 
 
Subject
जीवन का चित्र