Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1119

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
प्र꣢ स्वा꣣ना꣢सो꣣ र꣡था꣢ इ꣣वा꣡र्व꣢न्तो꣣ न꣡ श्र꣢व꣣स्य꣡वः꣢ । सो꣡मा꣢सो रा꣣ये꣡ अ꣢क्रमुः ॥१११९॥

प्र । स्वा꣣ना꣡सः꣢ । र꣡थाः꣢꣯ । इ꣢व । अ꣡र्व꣢꣯न्तः । न । श्र꣣वस्य꣡वः꣢ । सो꣡मा꣢꣯सः । रा꣡ये꣢ । अ꣣क्रमुः ॥१११९॥

Mantra without Swara
प्र स्वानासो रथा इवार्वन्तो न श्रवस्यवः । सोमासो राये अक्रमुः ॥

प्र । स्वानासः । रथाः । इव । अर्वन्तः । न । श्रवस्यवः । सोमासः । राये । अक्रमुः ॥१११९॥

Samveda - Mantra Number : 1119
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 8; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
(स्वानासः) = सदा प्रभु के गुणों का उच्चारण करनेवाले, अतएव 'अ-सित'=संसार के प्रलोभनों में न फँसनेवाले, (श्रवस्यवः) = ज्ञान की कामनावाले, अतएव 'काश्यप'= ज्ञानी – तत्त्वदर्शी बननेवाले, (सोमासः) = सोम के पुञ्ज तथा विनीत, अतएव 'देवल'- दिव्य गुणों का आदान करनेवाले (रथाः इव) = गतिशील रथों के समान आगे और आगे बढ़नेवाले तथा (अर्वन्तः न) = मार्ग की सब बाधाओं को समाप्त कर आगे बढ़ते हुए [अर्व हिंसायाम्] घोड़ों के समान ये प्रभुभक्त (राये) = ज्ञानरूप परमैश्वर्य की प्राप्त के लिए (प्र अक्रमुः) = पराक्रम करते हैं |
Essence
प्रभु के गुणों का उच्चारण हमें 'अ-सित' बनाएगा, ज्ञान की कामना हमें काश्यप बनाएगी और सौम्यता से हम 'देवल' बनेंगे । ऐसा बनने से ही हम वास्तविक सम्पत्ति को प्राप्त करेंगे । "
Subject
'असित, कश्यप, देवल'