Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1112

1875 Mantra
Devata- विश्वे देवाः Rishi- भुवन आप्त्यः साधनो वा भौवनः Chhand- द्विपदा त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
आ꣣दित्यै꣢꣫रिन्द्रः꣣ स꣡ग꣢णो म꣣रु꣡द्भि꣢र꣣स्म꣡भ्यं꣢ भेष꣣जा꣡ क꣢रत् ॥१११२॥

आ꣣दित्यैः꣢ । आ꣣ । दित्यैः꣢ । इ꣡न्द्रः꣢꣯ । स꣡ग꣢꣯णः । स । ग꣣णः । मरु꣡द्भिः꣢ । अ꣣स्म꣡भ्य꣢म् । भे꣣षजा꣢ । क꣣रत् ॥१११२॥

Mantra without Swara
आदित्यैरिन्द्रः सगणो मरुद्भिरस्मभ्यं भेषजा करत् ॥

आदित्यैः । आ । दित्यैः । इन्द्रः । सगणः । स । गणः । मरुद्भिः । अस्मभ्यम् । भेषजा । करत् ॥१११२॥

Samveda - Mantra Number : 1112
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 7; Khand » 7;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
वह (इन्द्रः) = परमैश्वर्यवाला परमात्मा (सगण:) = पञ्चविंशति [२५] संख्याक गण के साथ [सारा संसार २५ पदार्थों में विभक्त हुआ है], (आदित्यैः) = सब गुणों का आदान करनेवाले विद्वानों के द्वारा तथा (मरुद्भिः) = प्राणों के द्वारा (अस्मभ्यम्) = हमारे लिए (भेषजा करत्) = औषधों को करे ।

प्रकृति से महत्, महत् से अहंकार, अहंकार से पञ्चतन्मात्राएँ, १० इन्द्रियाँ व मन, तथा पञ्चतनमात्राओं से पञ्च स्थूलभूत तथा पुरुष [जीव] इस प्रकार सम्पूर्ण चराचर संसार पच्चीस गणों में विभक्त है। प्रभु ही इसके संचालक हैं। वे प्रभु इस पच्चीस के गण के साथ हमारा कल्याण करें।

हममें जो भी वासनारूप अध्यात्मरोग उत्पन्न हो जाए उनका औषध तो वे प्रभु आदित्य विद्वानों के सम्पर्क द्वारा करें तथा जो भी शरीर-रोग उत्पन्न हों उन्हें प्राणों द्वारा [मरुतों के द्वारा] दूर करें । आदित्यों का सम्पर्क हमें दुर्गुणों से बचाएगा तथा प्राणों की साधना हमें रोगों से बचाएगी। इस प्रकार हमारा शरीर व मन दोनों ही स्वस्थ होंगे- हम आधि-व्याधिशून्य सुन्दर जीवन बिता पाएँगे। 
Essence
हम आदित्यों व मरुतों द्वारा आधि-व्याधि से ऊपर उठ जाएँ।
Subject
आधि-व्याधि से दूर