Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1109

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- बन्धुः सुबन्धुः श्रुतबन्धुर्विप्रबन्धुश्च क्रमेण गौपायना लौपायना वा Chhand- द्विपदा विराट् Swara- पञ्चमः
Mantra with Swara
तं꣡ त्वा꣢ शोचिष्ठ दीदिवः सु꣣म्ना꣡य꣢ नू꣣न꣡मी꣢महे꣣ स꣡खि꣢भ्यः ॥११०९॥

त꣢म् । त्वा꣣ । शोचिष्ठ । दीदिवः । सुम्ना꣡य꣢ । नू꣣न꣢म् । ई꣣महे । स꣡खि꣢꣯भ्यः । स । खि꣣भ्यः ॥११०९॥

Mantra without Swara
तं त्वा शोचिष्ठ दीदिवः सुम्नाय नूनमीमहे सखिभ्यः ॥

तम् । त्वा । शोचिष्ठ । दीदिवः । सुम्नाय । नूनम् । ईमहे । सखिभ्यः । स । खिभ्यः ॥११०९॥

Samveda - Mantra Number : 1109
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 7; Khand » 7;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (शोचिष्ठ) = अत्यन्त दीप्तिमन्, पवित्र प्रभो ! (दीदिवः) = [देवयति क्रीडयति] सारे संसार को क्रीड़ा करानेवाले प्रभो ! (तं त्वा) = उस आपसे हम (नूनम्) = निश्चय से (सुम्नाय) = आपके स्तवन के लिए, सुख व रक्षण के लिए तथा (सखिभ्यः) = उत्तम मित्रों के लिए (ईमहे) = याचना करते हैं । वे प्रभु अत्यन्त दीप्त व पवित्र हैं - वे ही वस्तुतः इस संसार की सम्पूर्ण क्रीड़ा को कर रहे हैं । प्रभुकृपा से हमारा जीवन प्रभु-स्तवन करनेवाला हो । प्रभुकृपा से हम सुखी हों – प्रभु-रक्षण हमें सदा प्राप्त हो और सबसे महत्त्वपूर्ण बात यह कि प्रभु की दया से हम सदा उत्तम साथियों को प्राप्त करें ।
Essence
हम प्रभु-स्तवन करें – प्रभु के आनन्द व रक्षण को प्राप्त करें । हमें उत्तम मित्रों के साथ रहने का प्रसङ्ग मिले । 
Subject
उत्तम मित्रों के साथ