Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1105

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- कुत्स आङ्गिरसः Chhand- त्रिष्टुप् Swara- धैवतः
Mantra with Swara
उ꣣त꣡ न꣢ ए꣣ना꣡ प꣢व꣣या꣡ प꣢व꣣स्वा꣡धि꣢ श्रु꣣ते꣢ श्र꣣वा꣡य्य꣢स्य ती꣣र्थे꣢ । ष꣣ष्टि꣢ꣳ स꣣ह꣡स्रा꣢ नैगु꣣तो꣡ वसू꣢꣯नि वृ꣣क्षं꣢꣫ न प꣣क्वं꣡ धू꣢नव꣣द्र꣡णा꣢य ॥११०५॥

उ꣣त꣢ । नः꣣ । एना꣢ । प꣣वया꣢ । प꣢वस्व । अ꣡धि꣢꣯ । श्रु꣣ते꣢ । श्र꣣वा꣡य्य꣢स्य । ती꣣र्थे꣢ । ष꣣ष्टि꣢म् । स꣣ह꣡स्रा꣢ । नै꣣गुतः꣢ । नै꣣ । गुतः꣢ । व꣡सू꣢꣯नि । वृ꣣क्ष꣢म् । न । प꣣क्व꣡म् । धू꣣नवत् । र꣡णा꣢꣯य ॥११०५॥

Mantra without Swara
उत न एना पवया पवस्वाधि श्रुते श्रवाय्यस्य तीर्थे । षष्टिꣳ सहस्रा नैगुतो वसूनि वृक्षं न पक्वं धूनवद्रणाय ॥

उत । नः । एना । पवया । पवस्व । अधि । श्रुते । श्रवाय्यस्य । तीर्थे । षष्टिम् । सहस्रा । नैगुतः । नै । गुतः । वसूनि । वृक्षम् । न । पक्वम् । धूनवत् । रणाय ॥११०५॥

Samveda - Mantra Number : 1105
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 7; Khand » 6;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
प्रस्तुत मन्त्रों का ऋषि कुत्स है, जो [कुथ हिंसायाम् ] सब अशुभों की हिंसा करके शुभों को प्राप्त करता है। दुरितों से दूर और शुभों के समीप होने के कारण ही यह 'आङ्गिरस' भी है—अङ्गप्रत्यङ्ग में शक्तिवाला है । यह प्रभु से प्रार्थना करता है कि आप १. (न:) = हमें (एना पवया)  = इस पावन क्रिया से (पवस्व) = पवित्र कीजिए । २. (उत) = और हम सदा (अधिश्रुते) = शास्त्रश्रवण में स्थित हों। ३. (श्रवाय्यस्य) = वेदवाणियों से श्रोतव्य प्रभु के (तीर्थे) = तारक स्थान में हम सदा निवास करनेवाले हों, अर्थात् प्रभुनिष्ठ होने के लिए सदा प्रभु का ध्यान करें। ४. (नैगुतः) = भक्तों के प्रिय प्रभो! [नु शब्दे, नितरां शब्दायन्ते परमेश्वरम् निगुतः=भक्ता, तेषामयम्], आप (रणाय) = हमारे आध्यात्मिक संग्राम के लिए (षष्टिं सहस्रा) = अनन्त (वसूनि) = ज्ञानों को (धूनवत्) = प्राप्त कराते हैं, (न) = उसी प्रकार जैसेकि कोई भी व्यक्ति फलों की कामना से (पक्वं वृक्षम्) = पके फलोंवाले वृक्ष को (धूनवत्) = कम्पित करता है । 
Essence
प्रभु तीर्थ हैं, भक्त लोग उस तीर्थ में स्नान करते हैं और अपने जीवनों को पवित्र कर लेते हैं।
Subject
तीर्थ में स्नान
Footnote
नोट – ' षष्टिं सहस्रा' शब्द सामान्यतः 'आनन्त्य' के लिए पारिभाषिक शब्द है ।