Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1089

1875 Mantra
Devata- इन्द्रः Rishi- मधुच्छन्दा वैश्वामित्रः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣡था꣢ ते꣣ अ꣡न्त꣢मानां वि꣣द्या꣡म꣢ सुमती꣣ना꣢म् । मा꣢ नो꣣ अ꣡ति꣢ ख्य꣣ आ꣡ ग꣢हि ॥१०८९॥

अ꣡थ꣢꣯ । ते꣣ । अ꣡न्त꣢꣯मानाम् । वि꣣द्या꣡म꣢ । सु꣣मतीना꣢म् । सु꣣ । मतीना꣢म् । मा । नः꣣ । अ꣡ति꣢꣯ । ख्यः꣣ । आ꣢ । ग꣣हि ॥१०८९॥

Mantra without Swara
अथा ते अन्तमानां विद्याम सुमतीनाम् । मा नो अति ख्य आ गहि ॥

अथ । ते । अन्तमानाम् । विद्याम । सुमतीनाम् । सु । मतीनाम् । मा । नः । अति । ख्यः । आ । गहि ॥१०८९॥

Samveda - Mantra Number : 1089
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 7; Khand » 5;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
‘मधुच्छन्दाः’ प्रभु से प्रार्थना करता है— हे प्रभो ! १. (अथ) = अब हम (ते) - आपकी अन्तमानाम्अति समीपवर्ती (सुमतीनाम्) = कल्याणी मतियों को (विद्याम) = जानें । आप तो हमारे हृदय में ही स्थित हो, अतः आपकी कल्याणी मति हमारे अन्तिकतम ही है । हम हृदय के मालिन्य के कारण उसे जान नहीं पाते । आपकी कृपा से हम उस बुद्धि के प्रकाश को देखनेवाले हों । २. हे प्रभो ! नः=हमारा मा= मत अतिख्यः - उल्लंघन कीजिए- हमारा निराकरण मत कीजिए, आगहि- आप हमें अवश्य प्राप्त होओ।
Essence
हम प्रभु की कल्याणी मति को प्राप्त करनेवाले हों ।
Subject
मधुच्छन्दा की सर्वमधुर इच्छा