Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1069

1875 Mantra
Devata- आदित्याः Rishi- वसिष्ठो मैत्रावरुणिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ते꣡ स्या꣢म देव वरुण꣣ ते꣡ मि꣢त्र सू꣣रि꣡भिः꣢ स꣣ह꣢ । इ꣢ष꣣꣬ꣳ स्व꣢꣯श्च धीमहि ॥१०६९॥

ते꣢ । स्या꣣म । देव । वरुण । ते꣢ । मि꣣त्र । मि । त्र । सूरि꣡भिः꣢ । स꣣ह꣢ । इ꣡ष꣢꣯म् । स्वऽ३रि꣡ति꣢ । च꣣ । धीमहि ॥१०६९॥

Mantra without Swara
ते स्याम देव वरुण ते मित्र सूरिभिः सह । इषꣳ स्वश्च धीमहि ॥

ते । स्याम । देव । वरुण । ते । मित्र । मि । त्र । सूरिभिः । सह । इषम् । स्वऽ३रिति । च । धीमहि ॥१०६९॥

Samveda - Mantra Number : 1069
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 7; Khand » 3;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (देव मित्र वरुण) - दिव्य गुणों को जन्म देनेवाले प्राण और अपान (ते) = वे हम (ते) = तुम्हारे (स्याम) = हों, अर्थात् सदा तुम्हारी साधना में लगे हुए हम तुम्हारे आराधक बनें । प्राणापान को क्षीण करनेवाली किसी भी वस्तु को न अपनाएँ— उसका सेवन न करें। युक्ताहार-विहार, कर्मों में युक्त चेष्टा तथा युक्त स्वप्नावबोधवाले होकर हम तुम्हारी साधना में तत्पर रहें और इस प्रकार प्राणसाधना से अपनी बुद्धियों को सूक्ष्म करके (सूरिभिः सह) = विद्वानों के सम्पर्क में रहते हुए (इषम्) = वेद में दी गयी प्रभुप्रेरणा को (स्वः च) = और प्रकाश को (धीमहि) =  अपने में धारण करें ।
Essence
प्राणापान की साधना से हम बुद्धियों को सूक्ष्म करके प्रभु की प्रेरणा व प्रकाश को प्राप्त करें ।
Subject
प्रेरणा व प्रकाश