Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1052

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- हिरण्यस्तूप आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
त꣢व꣣ क्र꣢त्वा꣣ त꣢वो꣣ति꣢भि꣣र्ज्यो꣡क्प꣢श्येम꣣ सू꣡र्य꣢म् । अ꣡था꣢ नो꣣ व꣡स्य꣢सस्कृधि ॥१०५२॥

त꣡व꣢꣯ । क्र꣡त्वा꣢꣯ । त꣡व꣢꣯ । ऊ꣣ति꣡भिः꣢ । ज्योक् । प꣣श्येम । सू꣡र्य꣢꣯म् । अ꣡थ꣢꣯ । नः꣣ । व꣡स्य꣢꣯सः । कृ꣣धि ॥१०५२॥

Mantra without Swara
तव क्रत्वा तवोतिभिर्ज्योक्पश्येम सूर्यम् । अथा नो वस्यसस्कृधि ॥

तव । क्रत्वा । तव । ऊतिभिः । ज्योक् । पश्येम । सूर्यम् । अथ । नः । वस्यसः । कृधि ॥१०५२॥

Samveda - Mantra Number : 1052
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 7; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे प्रभो ! हम (तव क्रत्वा) = आपकी प्रेरणा से तथा (तव ऊतिभिः) = आपकी रक्षाओं से (ज्योक्) = दीर्घकाल तक (सूर्यं पश्येम) = सूर्य का दर्शन करनेवाले बनें । दीर्घकाल तक सूर्य-दर्शन यह मुहाविरा वेद में दीर्घ-जीवन के लिए आता है। ‘हम सूर्यदर्शन से विच्छिन्न न हों' - यह प्रार्थना आयुष्यसूक्तों में उपलभ्य है। यह सूर्य नाशक रक्षसों का – रोगकृमियों का नाश करनेवाला है । रोगकृमियों का नाश करके यह दीर्घजीवन का कारण बनता है। प्रभु हमें सदा सूर्यदर्शन में रहने की प्रेरणा देते हैं । वेद में उन्हीं घरों को उत्तम समझा गया है, जिनमें सूर्य किरणों का खूब प्रवेश होता है।' इस प्रकार हे प्रभो! (अथ नः वस्यसः कृधि) = आप हमारे जीवनों को श्रेष्ठ बना दीजिए।
 
Essence
सूर्य मित्र है - मृत्यु से बचानेवाला है। इस तत्त्व को समझकर हम अधिक-सेअधिक सूर्य-दर्शन में निवास करनेवाले बनें ।
Subject
सदा सूर्य के सम्पर्क में