Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1049

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- हिरण्यस्तूप आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स꣢ना꣣ द꣡क्ष꣢मु꣣त꣢꣫ क्रतु꣣म꣡प꣢ सोम꣣ मृ꣡धो꣢ जहि । अ꣡था꣢ नो꣣ व꣡स्य꣢सस्कृधि ॥१०४९॥

स꣡न꣢꣯ । द꣡क्ष꣢꣯म् । उ꣣त꣢ । क्र꣡तु꣢꣯म् । अ꣡प꣢꣯ । सो꣣म । मृ꣡धः꣢꣯ । ज꣣हि । अ꣡थ꣢꣯ । नः꣣ । व꣡स्य꣢꣯सः । कृ꣣धि ॥१०४९॥

Mantra without Swara
सना दक्षमुत क्रतुमप सोम मृधो जहि । अथा नो वस्यसस्कृधि ॥

सन । दक्षम् । उत । क्रतुम् । अप । सोम । मृधः । जहि । अथ । नः । वस्यसः । कृधि ॥१०४९॥

Samveda - Mantra Number : 1049
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 7; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१ हे (सोम) = प्रभो! हमें (दक्षम्) = बल (सना) = प्राप्त कराइए । दक्ष शब्द में मानस शक्ति [ Mental power] योग्यता [ability], दृढ़निश्चय [resoluteness] व शक्ति [Strength] की भावना अन्तर्निहित है। प्रभुकृपा से हमें यह 'मानसबल, योग्यता, दृढ़निश्चय व शक्ति' प्राप्त हो । २. (उत) = और क्रतुम् [Intelligence, deliberation, Inspiration; Enlightenment] बुद्धि, विचार, प्रेरणा व

प्रकाश (सना) = दीजिए । (क्रतुम्) = हम प्रत्येक कार्य को योग्यता से करनेवाले हों [Efficiency]। हमारा प्रत्येक कार्य सोद्देश्य हो [ plan, design, purpose]। हम अपने कर्मों को दृढ़-सङ्कल्प के साथ करें [Resolution]। हमारा प्रत्येक कार्य प्रभु चरणों में अर्पित हो [offering worship]। हम अपने पवित्र कर्मों से प्रभु की उपासना कर रहे हों । ३. हे सोम ! आप (मृधः) = हमारे कामादि शत्रुओं को (अपजहि) = हमसे सुदूर नष्ट कीजिए । कामादि शत्रुओं के संहार से (अथ) = अब (नः) = हमें (वस्यसः) = उत्तम जीवनवाला (कृधि) = कीजिए ।
Essence
सोम के द्वारा हमें दक्षता प्राप्त हो, हम क्रतुमय जीवनवाले हों- कामादि का संहार कर जीवन को सुन्दर बनाएँ ।
Subject
दक्ष-क्रतु-कामसंहार