Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1048

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- हिरण्यस्तूप आङ्गिरसः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
स꣢ना꣣ ज्यो꣢तिः꣣ स꣢ना꣣ स्वा꣢३꣱र्वि꣡श्वा꣢ च सोम꣣ सौ꣡भ꣢गा । अ꣡था꣢ नो꣣ व꣡स्य꣢सस्कृधि ॥१०४८॥

स꣡न꣢꣯ । ज्यो꣡तिः꣢꣯ । सन꣢ । स्वः꣢ । वि꣡श्वा꣢꣯ । च꣣ । सोम । सौ꣡भ꣢꣯गा । सौ । भ꣣गा । अ꣡थ꣢꣯ । नः꣣ । व꣡स्य꣢꣯सः । कृ꣣धि ॥१०४८॥

Mantra without Swara
सना ज्योतिः सना स्वा३र्विश्वा च सोम सौभगा । अथा नो वस्यसस्कृधि ॥

सन । ज्योतिः । सन । स्वः । विश्वा । च । सोम । सौभगा । सौ । भगा । अथ । नः । वस्यसः । कृधि ॥१०४८॥

Samveda - Mantra Number : 1048
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 7; Khand » 2;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (सोम) = सोम [वीर्य] की रक्षा के द्वारा दर्शन का विषय बने हुए ब्रह्माण्ड के निर्माता प्रभो ! आप हमें १. (ज्योतिः) = प्रकाश (सना) = दीजिए। आपकी कृपा से हम सदा प्रकाश में विचरें । आत्मस्वरूप को जानें व जीवन-यात्रा के मार्ग को स्पष्टतया देखनेवाले हों । २. (स्वः) = आत्म-प्राप्तिरूप रमणीय सुख दीजिए। प्रकाश में विचरते हुए हम जीवन-यात्रा को पूर्ण करके मोक्ष-सुख को प्राप्त करनेवाले हों । ३. (च) = और इस जीवन में भी (विश्वा सौभगा) = सब सौभाग्यों को हमें प्राप्त कराइए । [सौभग=Happiness and prosperity] हमारे जीवन सुख व समृद्धि से युक्त हो । संक्षेप में हमारा जीवन ज्योतिर्मय हो। ज्योति में जीवन-यात्रा को पूरा करते हुए हम जहाँ मोक्ष-सुख [स्व:] व निःश्रेयस का लाभ करें वहाँ हमारा यह ऐहिक जीवन भी सुख-समृद्धि-सम्पन्न हो ((अथ नः वस्यसः कृधि)) = और हम उत्कृष्ट जीवनवाले बनें ।
Essence
सोम की कृपा से हमें प्रकाश, प्रकृष्ट आनन्द तथा सुख-समृद्धि प्राप्त हो ।
Subject
ज्योति, स्वः, सौभग