Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1043

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- मेधातिथिः काण्वः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
गि꣡र꣢स्त इन्द꣣ ओ꣡ज꣢सा मर्मृ꣣ज्य꣡न्ते꣢ अप꣣स्यु꣡वः꣢ । या꣢भि꣣र्म꣡दा꣢य꣣ शु꣡म्भ꣢से ॥१०४३॥

गि꣡रः꣢꣯ । ते꣣ । इन्दो । ओ꣡ज꣢꣯सा । म꣣र्मृज्य꣡न्ते꣢ । अ꣣पस्यु꣡वः꣢ । या꣡भिः꣢꣯ । म꣡दा꣢꣯य । शु꣡म्भ꣢꣯से ॥१०४३॥

Mantra without Swara
गिरस्त इन्द ओजसा मर्मृज्यन्ते अपस्युवः । याभिर्मदाय शुम्भसे ॥

गिरः । ते । इन्दो । ओजसा । मर्मृज्यन्ते । अपस्युवः । याभिः । मदाय । शुम्भसे ॥१०४३॥

Samveda - Mantra Number : 1043
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 7; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (इन्दो) = ज्ञानरूप परमैश्वर्यशाली प्रभो ! ते (गिरः) = आपकी वाणियाँ (अपस्युवः) = कर्मों को चाहनेवाली (ओजसा) = शक्ति के द्वारा (मर्मृज्यन्ते) = खूब ही शुद्ध कर डालती हैं, अर्थात् प्रभु की दी हुई ये वेदवाणियाँ ऐसी हैं कि ये मनुष्य की शक्ति को बढ़ाती हैं तथा उसके जीवन को शुद्ध कर देती है। वेदवाणियों का जीवन पर दो प्रकार का परिणाम है १. शक्ति और २. शुद्धि, परन्तु ये दोनों ही परिणाम दीखते तभी हैं जब हम उन वेदवाणियों के अनुसार कर्म में प्रवृत्त हों।

हे इन्दो ! ये वेदवाणियाँ वे हैं (याभि:) = जिनसे (मदाय) = उल्लास के लिए (शुम्भसे) = तू भक्तों के जीवन को सुभोभित करता है । इन वेदवाणियों का तीसरा परिणाम यह होता है कि हम अपने को सद्गुणों से अलंकृत कर पाते हैं । एवं, तीसरा और चौथा परिणाम, ३. उल्लास और ४. अलंकरण हैं।
Essence
वेदवाणियाँ क्रिया में परिणत की जाने पर चतुर्विध परिणाम को पैदा करती हैं – १. शक्ति, २. शुद्धि, ३. उल्लास और ४. अलंकरण ।
 
Subject
चतुर्विध परिणाम