Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1033

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- त्रय ऋषयः Chhand- जगती Swara- निषादः
Mantra with Swara
अ꣢ग्रे꣣ सि꣡न्धू꣢नां꣣ प꣡व꣢मानो अर्ष꣣त्य꣡ग्रे꣢ वा꣣चो꣡ अ꣢ग्रि꣣यो꣡ गोषु꣢꣯ गच्छसि । अ꣢ग्रे꣣ वा꣡ज꣢स्य भजसे म꣣ह꣡द्धन꣢꣯ꣳ स्वायु꣣धः꣢ सो꣣तृ꣡भिः꣢ सोम सूयसे ॥१०३३॥

अ꣡ग्रे꣢꣯ । सि꣡न्धू꣢꣯नाम् । प꣡व꣢꣯मानः । अ꣡र्षसि । अ꣡ग्रे꣢꣯ । वा꣣चः꣢ । अ꣡ग्रियः꣢ । गो꣡षु꣢꣯ । ग꣣च्छसि । अ꣡ग्रे꣢꣯ । वा꣡ज꣢꣯स्य । भ꣣जसे । मह꣢त् । ध꣡न꣢꣯म् । स्वा꣣यु꣢धः । सु꣡ । आयुधः꣢ । सो꣣तृ꣡भिः꣢ । सो꣣म । सूयसे ॥१०३३॥

Mantra without Swara
अग्रे सिन्धूनां पवमानो अर्षत्यग्रे वाचो अग्रियो गोषु गच्छसि । अग्रे वाजस्य भजसे महद्धनꣳ स्वायुधः सोतृभिः सोम सूयसे ॥

अग्रे । सिन्धूनाम् । पवमानः । अर्षसि । अग्रे । वाचः । अग्रियः । गोषु । गच्छसि । अग्रे । वाजस्य । भजसे । महत् । धनम् । स्वायुधः । सु । आयुधः । सोतृभिः । सोम । सूयसे ॥१०३३॥

Samveda - Mantra Number : 1033
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 4; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 7; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
१. (सिन्धूनाम्) = शरीर में प्रवाहित होनेवाले सोमकणों से अपने को (पवमानः) =पवित्र करनेवाले 'अकृष्टमाष'! तू (अग्रे असि) = आगे बढ़ता है, अर्थात् जीवन-यात्रा में तू उन्नति-ही-उन्नति करता चलता है। २. (वाचः अग्रे) = इस वेदवाणी के दृष्टिकोण से तू अग्रभाग में स्थित होता है, अर्थात् उत्कृष्ट वेदज्ञानी बनता है। ३. (गोषु) - सब ज्ञानेन्द्रियों में अथवा इन्द्रियमात्र में (अग्रियः गच्छसि) = तू आगे होनेवाला होता है । तेरी प्रत्येक इन्द्रिय की शक्ति का पूर्ण विकास होता है । ४. (वाजस्य अग्रे) = शक्ति के भी तू अग्रभाग में होता है, अर्थात् शक्तिशालियों का भी मुखिया बनता है ।५. (महत् धनं भजसे) = महनीय धन का तू सेवन करनेवाला होता है— उत्तममार्ग से धन कमाकर तू धनियों में भी श्रेष्ठ होता है ।

सोम के महत्त्व को अनुभव करता हुआ यह ‘अकृष्टमाष' सोम को सम्बोधित करते हुए कहता है कि हे (सोम) = सोम! तू (स्वायुधः) = उत्तम आयुध है, तेरे द्वारा ही सब अध्यात्मसंग्रामों में मुझे विजय प्राप्त होती है। हे सोम! तू (सोतृभिः) = [सु गतौ] गतिशील व्यक्तियों के द्वारा सूयसे जन्म दिया जाता है, गतिशील व्यक्ति ही सोम की रक्षा कर पाते हैं। 
Essence
हम सोम के महत्त्व को समझें। उसकी पवित्रता के द्वारा जीवन में हमारा स्थान सर्वोच्च हो ।
Subject
सर्वप्रथम स्थान में