Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 1000

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- असितः काश्यपो देवलो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
वृ꣡षा꣢ पुना꣣न꣡ आयू꣢꣯ꣳषि स्त꣣न꣢य꣣न्न꣡धि꣢ ब꣣र्हि꣡षि꣢ । ह꣢रिः꣣ स꣢꣫न्योनि꣣मा꣡स꣢दः ॥१०००॥

वृ꣡षा꣢꣯ । पु꣣नानः꣢ । आ꣡यू꣢꣯ꣳषि । स्त꣣न꣡य꣢न् । अ꣡धि꣢꣯ । ब꣣र्हि꣡षि꣢ । ह꣡रिः꣢꣯ । सन् । यो꣡नि꣢꣯म् । आ । अ꣣सदः ॥१०००॥

Mantra without Swara
वृषा पुनान आयूꣳषि स्तनयन्नधि बर्हिषि । हरिः सन्योनिमासदः ॥

वृषा । पुनानः । आयूꣳषि । स्तनयन् । अधि । बर्हिषि । हरिः । सन् । योनिम् । आ । असदः ॥१०००॥

Samveda - Mantra Number : 1000
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 3; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 6; Khand » 4;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे सोम! आप १. (वृषा) = शक्तिशाली हो अथवा सब सुखों का वर्षण करनेवाले हो । २. आप (आयूंषि) = हमारे जीवनों को (पुनान:) = पवित्र करते हो । प्रभु-स्मरण हमें वासनाओं से बचाता ही है। ३. आप (अधिबर्हिषि) = वासनाओं से शून्य किये गये हृदयान्तरिक्ष में (स्तनयन्) = गर्जते हो । प्रभु की वेदवाणी वासनाशून्य हृदय में सुनाई पड़ती है । ५. हे प्रभो ! (हरिः सन्) = सब दुःखों व मलों के हरण करनेवाले होते हुए, ६. (योनिम्) = अन्त:करणरूप गृह में (आसदः) = आसीन होओ।
Essence
प्रभु की वाणी वासनाशून्य हृदय में सुनाई पड़ती है।
Subject
वासना-शून्य हृदय में