Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

Samveda Mantra 10

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- वामदेवः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
अ꣢ग्ने꣣ वि꣡व꣢स्व꣣दा꣡ भ꣢रा꣣स्म꣡भ्य꣢मू꣣त꣡ये꣢ म꣣हे꣢ । दे꣣वो꣡ ह्यसि꣢꣯ नो दृ꣣शे꣢ ॥१०

अ꣡ग्ने꣢꣯ । वि꣡व꣢꣯स्वत् । वि । व꣣स्वत् । आ꣢ । भ꣣र । अस्म꣡भ्य꣢म् । ऊ꣣त꣡ये꣢ । म꣣हे꣢ । दे꣣वः꣢ । हि । अ꣡सि꣢꣯ । नः꣢ । दृशे꣢ ॥१०॥

Mantra without Swara
अग्ने विवस्वदा भरास्मभ्यमूतये महे । देवो ह्यसि नो दृशे ॥१०

अग्ने । विवस्वत् । वि । वस्वत् । आ । भर । अस्मभ्यम् । ऊतये । महे । देवः । हि । असि । नः । दृशे ॥१०॥

Samveda - Mantra Number : 10
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 1; Dashati » 1;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 1;

Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar)

हिन्दी
Samveda Bhashyam (Pandit Harisharan Siddhantalankar) - हिन्दी
Meaning
हे (अग्ने)=प्रभो! आप (देवः हि असि) = निश्चय से देव हैं। (देवो दानात्, दीपनात्, द्योतनाद्वा)= सब-कुछ देनेवाले हैं, स्वयं दीप्तिमय ज्योतिर्मय होते हुए औरों को ज्ञान की दीप्ति देनेवाले हैं। आप (अस्मभ्यम्)= हमारे लिए भी (विवस्वन्तम्)= ज्ञानी पुरुष को (आभर)=प्राप्त कराइए [विवस्वान् - विवस्वन्तं में विभक्ति व्यत्यय है] जिससे

१. (ऊतये)= उनसे उत्तम ज्ञान प्राप्त कर हम अपनी रक्षा के योग्य हों। ज्ञान ही हमें इन विषयों के जाल में फँसने से बचा सकता है।

२. (महे)= [महसे] तेज लिए भी हमें ज्ञानियों की प्राप्ति कराइए ।

३. (नः दृशे) = हमें इसलिए भी ज्ञानियों की प्राप्ति कराइए कि हम उनसे शब्दब्रह्म = सृष्टिविद्या का ज्ञान प्राप्त करके प्राकृतिक रचनाओं में आपकी महिमा को अनुभव करते हुए आपका दर्शन व साक्षात्कार कर सकें।

आपके साक्षात्कार से सब मलिनता को भस्म करके सुन्दर गुणोंवाले हम इस मन्त्र के ऋषि ‘वामदेव' बन पाएँ।
Essence
ज्ञानियों के सम्पर्क में आकर हम [१] विषय- जाल से अपनी रक्षा करके, [२] भोगों में शक्ति को जीर्ण न कर तेजस्वी बनते हुए [३] प्रभु के साक्षात्कार करनेवाले बनेंगे।
Subject
ज्ञानियों के सम्पर्क में