Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 92

1875 Mantra
Devata- अङ्गिराः Rishi- वामदेव: कश्यप:, असितो देवलो वा Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
इ꣣त꣢ ए꣣त꣢ उ꣣दा꣡रु꣢हन्दि꣣वः꣢ पृ꣣ष्ठा꣡न्या रु꣢꣯हन् । प्र꣢ भू꣣र्ज꣢यो꣣ य꣡था꣢ प꣣थो꣡द्यामङ्गि꣢꣯रसो ययुः ॥९२

इ꣣तः꣢ । ए꣣ते꣢ । उ꣣दा꣢रु꣢हन् । उ꣣त् । आ꣡रु꣢꣯हन् । दि꣣वः꣢ । पृ꣣ष्ठा꣡नि꣢ । आ । अ꣣रुहन् । प्र꣢ । भूः꣣ । ज꣡यः꣢꣯ । य꣡था꣢꣯ । प꣣था꣢ । उत् । द्याम् । अ꣡ङ्गि꣢꣯रसः । य꣣युः ॥९२॥

Mantra without Swara
इत एत उदारुहन्दिवः पृष्ठान्या रुहन् । प्र भूर्जयो यथा पथोद्यामङ्गिरसो ययुः ॥९२

इतः । एते । उदारुहन् । उत् । आरुहन् । दिवः । पृष्ठानि । आ । अरुहन् । प्र । भूः । जयः । यथा । पथा । उत् । द्याम् । अङ्गिरसः । ययुः ॥९२॥

Samveda - Mantra Number : 92
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 5;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 10;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(एते-अङ्गिरसः) ये सोम आदि नाम वाले परमात्मा के उपासक श्रवणशील मननशील निदिध्यासनशील आत्मसमर्पण द्वारा अङ्गी—अङ्गों के स्वामी स्वात्मा को रसीला बनाने वाले योगीजन (इतः-उदारुहन्) इस मर्त्य स्थिति से ऊपर उठ जाते हैं पुनः ऊपर उठते उठते (दिवः पृष्ठानि-आरुहन्) सूर्य की पृष्ठों पर—सूर्य की तेज रश्मियों पर आरूढ़ हो जाते हैं। “तेजो वै पृष्ठानि” [तै॰ सं॰ ५.५.८.१] “सूर्यद्वारेण ते विरजाः प्रयान्ति यत्रामृतः स पुरुषो ह्यव्यय आत्मा” [मुण्डको॰ १.२.११] (द्यां प्रययुः) तेजों रश्मियों द्वारा अमृतधाम को प्रगमन कर जाते हैं प्राप्त हो जाते हैं “द्यौरपराजिता अमृतेन विष्टा” [तै॰ ४.४.५.२] “त्रिपादस्यामृतं दिवि” [ऋ॰ १०.९०.३] (यथा भूर्जयः पथः) जैसे स्वगुणपराक्रमों से भूमण्डल पर जय पाते हुए राजा लोग उत्तम शासन पथों मार्गों को प्राप्त करते हैं।
Essence
सोम आदि नामों से परमात्मा की उपासना करने वाले श्रवण मनन निदिध्यासन परायण उपासकजन अङ्गों के स्वामी आत्मा को रसीला बनाने वाले योगीजन मरणदेह से ऊपर उठकर सूर्य की तेजोरूप रश्मियों पर आरूढ़ हो जाते हैं पुनः अमृतरूप मोक्षधाम को प्राप्त हो जाते हैं जैसे भूमि को जय करते हुए राजा लोग उत्तम शासन पथों—मार्गों को प्राप्त होते हैं॥२॥
Special
ऋषिः—वामदेवः (वननीय परमात्मा देव जिसका है ऐसा उपासक)॥ देवताः—विश्वेदेवाः (सब देवनामों से प्रसिद्ध परमात्मा के भिन्न भिन्न स्वरूप)॥