Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 90

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- वामदेवः कश्यपो वा मारीचो मनुर्वा वैवस्वत अभौ वा Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
जा꣣तः꣡ परे꣢꣯ण꣣ ध꣡र्म꣢णा꣣ य꣢त्स꣣वृ꣡द्भिः꣢ स꣣हा꣡भु꣢वः । पि꣣ता꣢꣫ यत्क꣣श्य꣡प꣢स्या꣣ग्निः꣢ श्र꣣द्धा꣢ मा꣣ता꣡ मनुः꣢꣯ क꣣विः꣢ ॥९०

जा꣣तः꣢ । प꣡रे꣢꣯ण । ध꣡र्म꣢꣯णा । यत् । स꣣वृ꣡द्भिः꣢ । स꣣ । वृ꣡द्भिः꣢꣯ । स꣣ह꣢ । अ꣡भु꣢꣯वः । पि꣣ता꣢ । यत् । क꣣श्य꣡प꣢स्य । अ꣣ग्निः꣢ । श्र꣣द्धा꣢ । श्र꣣त् । धा꣢ । मा꣣ता꣢ । म꣡नुः꣢꣯ । क꣣विः꣢ ॥९०॥

Mantra without Swara
जातः परेण धर्मणा यत्सवृद्भिः सहाभुवः । पिता यत्कश्यपस्याग्निः श्रद्धा माता मनुः कविः ॥९०

जातः । परेण । धर्मणा । यत् । सवृद्भिः । स । वृद्भिः । सह । अभुवः । पिता । यत् । कश्यपस्य । अग्निः । श्रद्धा । श्रत् । धा । माता । मनुः । कविः ॥९०॥

Samveda - Mantra Number : 90
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 9;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(अग्निः) पापों वासनाओं का शोधक ज्ञानप्रकाशक परमात्मा (यत्) ‘यः’ ‘लिङ्गव्यत्ययः’ जो (कश्यपस्य पिता) सूक्ष्मदर्शी मन को निरुद्ध करने वाले योगी का “कश्यपः पश्यको भवति यत् सर्वं परिपश्यतीति सौक्ष्म्यात्” [तै॰ आ॰ १.८.८] पिता—पालक (श्रद्धा माता) श्रद्धा वाले ‘श्रद्धावतः-मतुब्लोपश्छान्दसः’ श्रद्धा योग में प्रज्ञा के पश्चात् निष्ठा वाले आत्मसमर्पी की माता—मान करने वाला—आश्रय देने वाला “प्रज्ञापूर्वरूपं श्रद्धोत्तररूपम्” [शां॰ आ॰ ३.७] (मनुः कविः) ‘मनोः’ ‘विभक्तिव्यत्ययः’ मनन करने वाले का अनूचान—गुरु है “ये वा अनूचानास्ते कवयः” [ऐ॰ २.२.३८] (यत् सवृद्भिः सहाभुवः) जबकि इनके साथ समागम वर्तन करने वालों के द्वारा सहभाव को प्राप्त हुआ परमात्मा (परेण धर्मणा जातः) अलौकिक अमृतगुण से प्रसिद्ध—साक्षात् हुआ करता है।
Essence
परमात्मा सूक्ष्मदर्शी अभ्यासी का पिता—पालक, श्रद्धायुक्त वैराग्यवान् की माता और मननशील का आचार्य बनकर उनके द्वारा धारणा ध्यान समाधि में परम अमृतगुण के साथ साक्षात् होता है। इस प्रकार वह श्रवण, मनन, निदिध्यासन द्वारा साक्षात् हुआ करता है॥१०॥
Special
ऋषिः—मारीचो वामदेवः कश्यपो वा, मनुर्वैवस्वतो वा (वासनाओं को मार देने वाली वैराग्य ज्योतियों से सम्पन्न वननीयदेव वाला या शासन में आने योग्य मन से परमात्मामृत का पानकर्ता या सूर्यसमान ज्ञानप्रसारक परमात्मा का मननकर्ता जन)॥