Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 839

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- कविर्भार्गवः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣡धा꣢ हिन्वा꣣न꣡ इ꣢न्द्रि꣣यं꣡ ज्यायो꣢꣯ महि꣣त्व꣡मा꣢नशे । अ꣣भिष्टिकृ꣡द्विच꣢꣯र्षणिः ॥८३९॥

अ꣡ध꣢꣯ । हि꣡न्वानः꣢ । इ꣣न्द्रिय꣢म् । ज्या꣡यः꣢꣯ । म꣣हित्व꣢म् । आ꣣नशे । अभिष्टिकृ꣢त् । अ꣣भिष्टि । कृ꣢त् । वि꣡च꣢꣯र्षणिः । वि । च꣣र्षणिः ॥८३९॥

Mantra without Swara
अधा हिन्वान इन्द्रियं ज्यायो महित्वमानशे । अभिष्टिकृद्विचर्षणिः ॥

अध । हिन्वानः । इन्द्रियम् । ज्यायः । महित्वम् । आनशे । अभिष्टिकृत् । अभिष्टि । कृत् । विचर्षणिः । वि । चर्षणिः ॥८३९॥

Samveda - Mantra Number : 839
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 2;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 4; Khand » 1;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(अध) पुनः (ज्यायः-इन्द्रियं हिन्वानः) ज्येष्ठ इन्द्रिय अर्थात् मन को प्रेरित करता हुआ (महित्वम्-आनशे) मेरे द्वारा पूजन सत्कार को प्राप्त होता है (अभिष्टिकृत्-विचर्षणिः) तू कामना पूर्ण करने वाला विशेष कृपादृष्टि रखने वाला है।
Essence
शान्तस्वरूप परमात्मा उपासक के मन या अन्तःकरण को प्रेरित करता हुआ—कामनापूरक और कृपादृष्टि करने वाला होने से हमारे द्वारा पूजा पात्रता को प्राप्त है॥४॥
Special