Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 83

1875 Mantra
Devata- अग्निः Rishi- भरद्वाजो बार्हस्पत्यः Chhand- अनुष्टुप् Swara- गान्धारः Kaand Name- आग्नेयं काण्डम् Gaan- प्रकृति गान Gaan Parva- आग्नेयं पर्व
Mantra with Swara
त्वे꣣ष꣡स्ते꣢ धू꣣म꣡ ऋ꣢ण्वति दि꣣वि꣢꣫ सं च्छु꣣क्र꣡ आत꣢꣯तः । सू꣢रो꣣ न꣢꣫ हि द्यु꣣ता꣢꣫ त्वं कृ꣣पा꣡ पा꣢वक꣣ रो꣡च꣢से ॥८३॥

त्वे꣣षः꣢ । ते꣣ । धूमः꣢ । ऋ꣣ण्वति । दि꣣वि꣢ । सन् । शु꣣क्रः꣢ । आ꣡त꣢꣯तः । आ । त꣣तः । सू꣡रः꣢꣯ । न । हि । द्यु꣣ता꣢ । त्वम् । कृ꣣पा꣢ । पा꣣वक । रो꣡च꣢꣯से ॥८३॥

Mantra without Swara
त्वेषस्ते धूम ऋण्वति दिवि सं च्छुक्र आततः । सूरो न हि द्युता त्वं कृपा पावक रोचसे ॥

त्वेषः । ते । धूमः । ऋण्वति । दिवि । सन् । शुक्रः । आततः । आ । ततः । सूरः । न । हि । द्युता । त्वम् । कृपा । पावक । रोचसे ॥८३॥

Samveda - Mantra Number : 83
(Kauthum) पूर्वार्चिकः: » Prapathak » 1; Ardh Prapathak » 2; Dashati » 4;
(Rananiya) पूर्वार्चिकः: » Adhyay » 1; Khand » 9;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(पावक) हे पवित्र करने वाले परमात्मन्! (ते) तुझ (त्वेषः-धूमः) तेजस्वी का तेज (शुक्रः सन्) शुभ्र हुआ (दिवि-आततः) मोक्षधाम में समन्तरूप से वर्तमान हो “त्रिपादस्यामृत दिवि” [ऋ॰ १०.९०.३] (ऋण्वति) विश्व में गति कर रहा है “ऋण्वति गतिकर्मा” [निघं॰ २.१४] (हि सूरः-न द्युता) सचमुच सूर्य जैसे दीप्ति से, ऐसे (त्वं कृपा रोचसे) तू अपने तेजोमय सामर्थ्य से प्रकाशित हो रहा है।
Essence
परमात्मन्! मोक्षधाम में वर्तमान तेरा प्रकाशमय अमृतस्वरूप सारे जगत् में फैल रहा है, जैसे सूर्य अपनी प्रखर ज्योति से चमक रहा है ऐसे तू अपनी तेजोमयी शक्ति से विश्व में छाया हुआ है। तू महान् उपासनीय देव है॥३॥
Special
ऋषिः—वामदेवो वा भरद्वाजो वा (वननीय परमात्मदेव वाला या अमृत अन्न भोग को धारण करने वाला उपासक)॥