Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 805

1875 Mantra
Devata- पवमानः सोमः Rishi- भृगुर्वारुणिर्जमदग्निर्भार्गवो वा Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
अ꣣या꣢ चि꣣त्तो꣢ वि꣣पा꣢꣫नया꣣ ह꣡रिः꣢ पवस्व꣣ धा꣡र꣢या । यु꣢जं꣣ वा꣡जे꣢षु चोदय ॥८०५॥

अ꣣या꣢ । चि꣣त्तः꣢ । वि꣣पा꣢ । अ꣣न꣡या꣢ । ह꣡रिः꣢꣯ । प꣣वस्व । धा꣡र꣢꣯या । यु꣡ज꣢꣯म् । वा꣡जे꣢꣯षु । चो꣣दय ॥८०५॥

Mantra without Swara
अया चित्तो विपानया हरिः पवस्व धारया । युजं वाजेषु चोदय ॥

अया । चित्तः । विपा । अनया । हरिः । पवस्व । धारया । युजम् । वाजेषु । चोदय ॥८०५॥

Samveda - Mantra Number : 805
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 3;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(अया-अनया) हे शान्तस्वरूप परमात्मन्! इस प्रगतिमय—(विपा धारया) स्तुतिरूप वाणी से “धारा वाङ्नाम” [निघं॰ १.११] (चित्तः) संचेतित हुआ—प्रसन्न हुआ हमारी ओर कृपायमाण हुआ (हरिः) दुःखापहरणकर्त्ता सुखाहरणकर्त्ता बना (युजम्) युक्त—मुझ अपने से युक्त हुए को (वाजेषु) अमृत अन्नभोगों के निमित्त (चोदय) प्रेरित कर।
Essence
परमात्मा प्रगतिमय स्तुतिरूप वाणी से कृपायमाण हुआ दुःखापहरणकर्त्ता सुखाहरणकर्त्ता बना अपने साथ युक्त—योगी उपासक को अमृत भोगों के निमित्त प्रेरित करता है॥३॥
Special