Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

Samveda Mantra 802

1875 Mantra
Devata- इन्द्राग्नी Rishi- वसिष्ठो मैत्रावरुणिः Chhand- गायत्री Swara- षड्जः
Mantra with Swara
ता꣡ वां꣢ गी꣣र्भि꣡र्वि꣢प꣣न्यु꣢वः꣣ प्र꣡य꣢स्वन्तो हवामहे । मे꣣ध꣡सा꣢ता सनि꣣ष्य꣡वः꣢ ॥८०२॥

ता꣢ । वा꣣म् । गीर्भिः꣢ । वि꣣पन्यु꣡वः꣢ । प्र꣡य꣢꣯स्वन्तः । ह꣣वामहे । मेध꣡सा꣢ता । मे꣣ध꣢ । सा꣣ता । सनिष्य꣡वः꣢ ॥८०२॥

Mantra without Swara
ता वां गीर्भिर्विपन्युवः प्रयस्वन्तो हवामहे । मेधसाता सनिष्यवः ॥

ता । वाम् । गीर्भिः । विपन्युवः । प्रयस्वन्तः । हवामहे । मेधसाता । मेध । साता । सनिष्यवः ॥८०२॥

Samveda - Mantra Number : 802
(Kauthum) उत्तरार्चिकः: » Prapathak » 2; Ardh Prapathak » 1;
(Rananiya) उत्तरार्चिकः: » Adhyay » 3; Khand » 2;

Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak)

हिन्दी
Samveda Bhashya (Swami Brahmmuni Parivrajak) - हिन्दी
Meaning
(विपन्यवः) हम स्तुति करने वाले (प्रयस्वन्तः) स्तुतिरूप भेंट वाले (सनिष्यवः) सम्भजन करने वाले—उपासकजन (ता वाम्) उन तुम (मेधसाता) अध्यात्मयज्ञ में सेवन करने योग्य परमात्मा को (हवामहे) आमन्त्रित करते हैं।
Essence
हम स्तोता स्तुति भेंट देने वाले उपासकजन अध्यात्मयज्ञ में सेवनीय उस ऐश्वर्यवान् तथा ज्ञानप्रकाशवान् अग्रणेता परमात्मा को आमन्त्रित करें॥३॥
Special